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    तन्हाई मे गांड मरवाई

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    Antarvasna, hindi sex story: ट्रैफिक सिग्नल पर मैंने अपनी गाड़ी रोकी मैंने देखा सिग्नल अभी खुला नहीं था सिग्नल की लाल बत्ती ऑन थी और मैं सोचने लगा कि कैसे मैं सुनीता से बात करूं। मेरी शादीशुदा जीवन में उथल-पुथल के बाद सुनीता मेरे जीवन में आई थी और वह मेरी अच्छी दोस्त बन चुकी थी लेकिन मैं सुनीता से अपने दिल की बात कह नहीं पाया था। मेरी पत्नी और मेरी शादी 5 वर्ष पहले हुई थी और हमारी शादी से मेरी पत्नी को एक बच्चा भी हुआ लेकिन उसके बाद भी वह मेरे साथ खुश नहीं थी और वह मुझसे अलग रहने लगी। मेरे जीवन में बहुत अकेलापन था और मैं काफी तन्हा हो चुका था उस वक्त मेरी जिंदगी में सुनीता आई और उन्होंने कहीं ना कहीं मेरे दर्द को समझा और मैं उन्हें दिल ही दिल चाहने लगा था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि वह भी पहले से ही शादीशुदा है और उनका भी तलाक हो चुका है।

    मैं नहीं चाहता था कि मैं अपने दिल की बात उन्हें कहूं मुझे लगता था कि यदि कभी मैंने उन्हें ऐसा कहा तो उन्हें लगेगा कि शायद मैं उनके बारे में गलत सोचता हूं इसलिए मैंने अपने दिल की बात उनसे नहीं कहीं। मैं सुनीता जी से हर रोज मिला करता था वह हमारी कॉलोनी में ही रहने के लिए आई थी मैं भी अकेला रहता था मेरे मम्मी पापा चंडीगढ़ में रहते हैं और मैं अपनी नौकरी के सिलसिले में दिल्ली रहता हूं। पहले मैं भी चंडीगढ़ में ही जॉब करता था लेकिन जब से मैं दिल्ली आया हूं तब से मेरा मन चंडीगढ़ जाने का नहीं हुआ चंडीगढ़ में वही पुरानी यादें मेरा पीछा कर रही है इसलिए मैं उन यादों से दूर भागने की कोशिश में दिल्ली में ही नौकरी करने लगा। हमारे ही कॉलोनी में सुनीता जी रहती थी उनसे मेरी मुलाकात जब पहली बार हुई तो पहली बार में ही वह मुझे भा गई थी। कुछ दिनों के लिए मुझे अपने काम के सिलसिले में कोलकाता जाना था उस दिन मेरे पास सुनीता जी आई और वह कहने लगे कि क्या आपके पास आज समय होगा।

    मैंने उन्हें कहा हां सुनीता जी कहिये क्या कोई जरूरी काम था तो वह कहने लगी कि हां मैं सोच रही थी कि मैं बाजार से कुछ सामान ले आऊं क्या आप मेरी मदद कर देंगे तो मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं। हम दोनों साथ में चले गए और उन्हें कुछ सामान खरीदना था उन्होंने वह सामान खरीद लिया था मैंने उन्हें बताया कि मैं कुछ दिनों के लिए कोलकाता जा रहा हूं। वह मुझे कहने लगी कि आप कोलकाता से कब लौटेंगे तो मैंने उन्हें कहा मुझे कोलकाता से आने में थोड़ा समय लग जाएगा वह कहने लगी आप क्या कुछ जरूरी काम से जा रहे हैं। मैंने उन्हें बताया हां मैं अपने ऑफिस के कुछ जरूरी काम से कोलकता जा रहा हूं वह मुझसे कहने लगी कि कोलकाता में मेरी दीदी भी रहती है यदि आपको कोई परेशानी हो तो आप मुझे बता दीजिएगा। मैंने उन्हें कहा नहीं मेरा रहने का बंदोबस्त मेरी कंपनी ने कर दिया है यदि ऐसी कोई परेशानी होगी तो मैं जरूर आपको बताऊंगा। सुनीता जी को मैंने उनके घर पर छोड़ दिया था और उसके बाद मैं अपने घर पर आराम करने लगा मुझे अपना सामान पैक करना था क्योंकि मुझे अगले दिन ही कोलकाता के लिए निकलना था। मैं अपना सामान पैक करने लगा मैंने अपना सामान पैक कर लिया था और जब मैंने अगले दिन सुबह अपनी ट्रेन का स्टेटस चेक किया तो ट्रेन कुछ घंटे लेट आने वाली थी मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि ट्रेन देरी से चल रही है। मेरी ट्रेन सुबह 7:00 बजे की थी लेकिन मैं घर से 9:00 बजे निकला ट्रेन करीब 3 घंटे लेट चल रही थी और मैं जब रेलवे स्टेशन पहुंचा तो वहां पर भी मुझे कुछ देर तक इंतजार करना पड़ा। मैं ट्रेन का इंतजार कर रहा था तभी कुछ देर बाद ट्रेन आ गई और जैसे ही मैं ट्रेन में बैठा तो सुनीता जी ने मुझे फोन किया और कहा अनिल जी क्या आप कोलकाता के लिए निकल चुके हैं। मैंने उन्हें कहा नहीं सुनीता जी मैं अभी ट्रेन में बैठा ही हूं दरअसल ट्रेन कुछ देरी से चल रही थी तो मैं घर से भी कुछ देरी से निकला था तो वह मुझे कहने लगी कि मुझे लगा आप शायद दोपहर के बाद जाएंगे। मैंने उन्हें कहा क्या कोई जरूरी काम था वह मुझे कहने लगी कि नहीं कुछ काम तो नहीं था लेकिन मैंने आपके लिए टिफिन बनाया था मुझे लगा कि मैं आपको टिफिन दे दूंगी।

    मैंने कहा कोई बात नहीं सुनीता जी अब तो मैं निकल चुका हूं। सुनीता जी मेरा बहुत ही ध्यान रखा करते थे लेकिन मुझे इस रिश्ते का कोई नाम नहीं सूझ रहा था क्योंकि हम दोनों की जिंदगी एक जैसी ही थी और मुझे लगता था कि हम दोनों एक दूसरे को समझ सकते हैं। मैंने फोन रख दिया था और ट्रेन थोड़ी देर बाद चलने वाली थी ट्रेन जब चलने लगी तो मैंने अपने कान में हेडफोन लगा लिया और मैं अपने मोबाइल में गाने सुनने लगा। मैं कोलकाता पहुंच चुका था और कोलकाता पहुंचने के बाद कुछ समय तक मैं कोलकाता में ही रुक उसके बाद जब मैं दिल्ली के लिए लौटा तो सुनीता जी का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि आप दिल्ली कब आ रहे हैं। मैंने उन्हें कहा मैं कुछ दिनों में दिल्ली आ जाऊंगा मैं जब दिल्ली पहुंचा तो मैंने सुनीता जी को फोन कर दिया और मैंने उन्हें कहा कि मैं दिल्ली लौट चुका हूं। काफी दिनों से मैं उनसे मिला नहीं था तो सोचा मैं सुनीता जी से मिलने के लिए उनके घर पर चला जाता हूं फिर मैं उनसे मिलने के लिए उनके घर पर चला गया। मैं जब उनके घर पर उनसे मिलने के लिए गया तो वह कोई पेंटिंग बना रही थी उन्हें पेंटिंग बनाने का बड़ा शौक था। मैंने उन्हें कहा आप आज कौन सी पेंटिंग बना रही है मैं कुछ समझ नहीं पाया लेकिन वह कहने लगी कि जब यह पेंटिंग बन कर तैयार हो जाएगी तो आपको यह बहुत अच्छी लगेगी। सुनीता जी मेरे पास आकर बैठी और मैंने उन्हें कहा पेंटिंग तो बड़ी शानदार बना रही है।

    वह मुझे कहने लगी कि बस ऐसे ही दिल की कुछ तनहाइयां हैं उनको दूर कर लेती हूं मैंने उन्हें कहा लेकिन आपको किस चीज का दुख है? वह मुझे कहने लगी अब आपको क्या बताऊं मैं कितनी अकेली हूं। मैंने उन्हें कहा मै भी अकेला हूं वह जब मेरे पास बैठी हुई थी तो वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी। मैंने सुनीता जी को अपनी बाहों में लिया तो वह मुझे कहने लगी मुझे किसी की तो जरूरत है जो मेरी बातों को सुन सके। वह बहुत ज्यादा तन्हा और अकेली थी मैंने उनके नरम होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा और उन्हें भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने अपने लंड को उनके मुंह में डालना शुरू किया तो उन्होंने भी मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया था और उसे वह बड़े ही अच्छे से सकिंग कर रही थी मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था और उन्हें बड़ा मजा आता। काफी देर तक ऐसा करने के बाद जब मैंने उन्हें कहा कि क्या आपकी चूत से में खेल सकता हूं? वह कहने लगी क्यों नहीं और यह कहते ही मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया उनकी चूत से मैंने पानी बाहर निकाल कर रख दिया। उनकी चूत से बहुत ज्यादा गिला पदार्थ बाहर निकलने लगा था वह अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकिया लेना लगी मैं उत्तेजित हो गया था और वह भी बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी। मैंने जैसे ही उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया तो वह चिल्लाने लगी मेरा लंड उनकी चूत के अंदर तक जा चुका था अब उनकी योनि की चिकनाई में बढ़ोतरी होने लगी थी मुझे अच्छा लग रहा था। उनके दोनों पैरों को मैं खोलने लगा और वह मुझे कहने लगी मेरी चूत का भोसड़ा बना डालो।

    मैंने सुनीता जी से कहा आज मैं आपके मुंह से पहली बार ऐसी बातें सुन रहा हूं वह कहने लगी कितने दिनों से मैं तड़प रही थी लेकिन अपनी इज्जत की खातिर में कहीं बाहर तो नहीं जा सकती है आज आपने मेरी दुखती रथ पर हाथ रखते हुए मुझे चोदना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगा। मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और उनकी चूत पर मैं जिस प्रकार से मै प्रहार करने लगा मुझे भी मज़ा आ रहा था और उनको बहुत अच्छा लग रहा था। वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी और कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने उन्हें कहा मजा तो मुझे भी बड़ा आ रहा है। वह मुझे कहने लगी मुझे आपको चूत मारने में मजा आ रहा है और काफी देर तक में उनकी चूत के मजे लेता रहा जब उनकी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी निकालने लगी तो वह मुझे कहने लगी अब मुझसे रहा नहीं जाएगा। मैंने उन्हें कहा मैं भी नहीं रह पा रहा हूं लेकिन फिर भी आपको धक्के मारने में मजा आ रहा है और जब मैंने उनकी चूत के अंदर अपने माल को गिराया तो वह मुझे कहने लगी मैं आपके माल को अपने मुंह में लेना चाहती हूं।

    जिस प्रकार से उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मुझे भी अच्छा लगा मेरा लंड उन्होंने चाटकर पूरा साफ कर दिया था वह अपनी चूत को साफ कर रही थी तो मैं उनकी बड़ी गांड को देखे जा रहा था। उनकी बड़ी गांड को देखकर मैंने लंड को खड़ा किया और उनकी गांड के अंदर लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाने लगी। मेरा लंड उनकी गांड के अंदर तक जा चुका था मुझे अब और भी ज्यादा अच्छा लगने लगा था वह मुझे कहने लगी पहले मेरे पति मेरी गांड का बहुत मजा लिया करते थे काफी समय से मेरी गांड के किसी ने मजे नहीं लिए है। वह अपनी चूतडो को मुझसे टकरा रही थी जिस प्रकार से उनकी चूतडे मुझसे टकराती मेरा लंड उनकी गांड के अंदर तक घुसा जाता काफी देर ऐसा करने के बाद उनकी गांड से गर्मी बाहर की तरफ को निकालने लगी। वह मुझे कहने लगी मुझे गर्मी का एहसास हो रहा है और आपके लंड और मेरी गांड से ज रगडन पैदा हो रही है उसे हम दोनों ही नहीं झेल पाएंगे और कुछ देर बाद मेरा वीर्य सुनीता जी की गांड की शोभा बन चुका था।

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