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    नंगा बदन देख व्याकुलता बढ़ी

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    Antarvasna, desi kahani: मेरे और आकांक्षा के बीच में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था आकांक्षा मुझे कहने लगी कि मुझे तुमसे डिवोर्स चाहिए लेकिन मैं आकांक्षा को डिवोर्स नहीं देना चाहता था। मैं चाहता था कि अब भी यदि हमारे रिश्ते पहले की तरह ठीक हो पाए तो शायद सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन आकांक्षा को शायद अब इस बात पर भरोसा ही नहीं था कि हम दोनों पहले की तरह अपने रिश्ते को ठीक कर पाएंगे। आकांक्षा और मेरे बीच में कड़वाहट की वजह आकांक्षा के परिवार वाले थे आकांक्षा हर छोटी बड़ी बात को अपने परिवार से कह दिया करती थी जिससे कि मेरे और आकांक्षा के रिश्ते में दरार पैदा होने लगी थी। मुझे यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं थी और अब यह झगड़े की वजह बनने लगा था। झगड़ा धीरे-धीरे बढ़ता चला गया और बात अब डिवोर्स तक आ चुकी थी मेरे पास भी शायद अब इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

    मैंने आकांक्षा को डिवोर्स देने के बारे में सोच लिया था और मैंने यह भी सोच लिया था कि मुझे जल्द से जल्द आकांक्षा केओ डिवोर्स दे देना चाहिए। वह मेरे साथ बिल्कुल भी खुश नहीं थी और हम दोनों ने एक दूसरे को डिवोर्स देने का पूरा मन बना लिया था हम दोनों एक दूसरे से अलग रहने लगे थे, आकांक्षा की बहुत सी यादें थी जो मेरे दिल में अभी तक थी। जब मैं आकांशा से पहली बार मिला था तो मुझे उससे मिलकर बहुत खुशी हुई थी और आकांक्षा से मिलकर मुझे इतनी खुशी हुई की मैंने उसके बाद आकांक्षा से शादी करने का फैसला कर लिया था। मुझे नहीं मालूम था कि मेरा फैसला जल्द ही गलत हो जाएगा और मेरा फैसला बहुत जल्दी ही गलत साबित हो गया। आकांशा और मेरे बीच डिवोर्स हो गया मेरे माता-पिता भी इस बात से खुश नहीं थे और वह लोग मुझे कई बार इस बात को लेकर कहते भी थे कि बेटा तुम्हें और आकांक्षा को अपने रिश्ते को लेकर बात करनी चाहिए और दोबारा से अपने रिश्ते को शुरू कर लेना चाहिए। मैंने उन्हें साफ तौर पर मना कर दिया था और कहा कि आकांशा और मेरा रिश्ता पहले की तरह बिल्कुल भी नहीं हो सकता।

    मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं है कि अब हम दोनों अपने रिश्ते को पहले की तरह बना पाएंगे क्योंकि सब कुछ बदल चुका था पहले की तरह कुछ भी नहीं था आकांक्षा को हमेशा ही मुझ में अब कमी महसूस होने लगी थी। आकांक्षा हर बात में मुझ में कमी निकालने लगी थी और मैं भी उसके साथ छोटी-छोटी बातों में झगड़ने लगा था इसी वजह से हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गए थे और अलग होने का हमारा मुख्य कारण यही था परंतु अब भी हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बात कर लिया करते थे। आकांक्षा कभी-कबार मुझसे मेरे हाल पूछ लिया करती थी मैं आकांक्षा को सब कुछ बता दिया करता था कि मैं ठीक हूं लेकिन मैं अपने जीवन में खुश नहीं था मैं बहुत ज्यादा परेशान था और मेरी परेशानी की वजह सिर्फ और सिर्फ आकांक्षा ही थी। आकांक्षा की वजह से ही मैं परेशान था और मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मुझे अब आगे क्या करना चाहिए। मेरे ऑफिस में काम करने वाले मेरे जितने भी दोस्त हैं वह सब मेरे और आकांक्षा के रिश्ते को बीच में लाते थे मैं उन्हें कई बार मना कर चुका था कि मुझे यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं है लेकिन उसके बाद भी आकांक्षा का नाम वह लोग मेरे सामने ले ही लेते थे। मेरा मन कुछ दिनों से बहुत ही अकेला हो चुका था मैं चाहता था कि मैं कहीं घूमने के लिए चला जाऊं और कुछ दिनों के लिए मैं अकेले ही घूमने के लिए निकल पड़ा। मैं चाहता था कि कुछ दिन शांति से किसी एकांत जगह रहूं और मैं घूमने के लिए दार्जिलिंग चला गया मैं जब दार्जिलिंग गया तो वहां पर मुझे काफी अच्छा लगा और मैंने एक रूम किराए पर ले लिया। मैं कुछ समय तक दार्जिलिंग में ही रहना चाहता था मैं अपनी परेशानी से दूर जा चुका था और फिलहाल मैं किसी से भी संपर्क में नहीं था और आकांक्षा से भी मेरा कोई संपर्क नही था और ना हीं मेरे माता-पिता से मैं संपर्क में था। अब मैं इस बात से थोड़ा सा खुश तो था ही कि मैं कुछ समय के लिए अलग रहने के लिए आ चुका हूं और दार्जिलिंग में रहते हुए मेरी मुलाकात एक बुजुर्ग व्यक्ति से हुई उनकी उम्र 60 वर्ष के आसपास रही होगी उनसे मुझे काफी मदद मिली।

    उन्होंने मेरा परिचय आसपास के लोगों से भी करवाया और उसके बाद तो जैसे मैं वहां घुल मिल गया था और मुझे करीब एक महीना हो गया था एक महीने बाद मैंने अपने पापा मम्मी को फोन किया तो वह कहने लगे कि गगन बेटा तुम कहां हो तुम बिना बताए ही पता नहीं कहां चले गए। मैंने मां से कहा देखो मां आप मेरी चिंता मत कीजिए मैं ठीक हूं और मैं जल्दी ही घर लौट आऊंगा। मैं अब अपने जीवन को शायद पहले की तरह ही जीना चाहता था और मैं जब दार्जिलिंग में आया तो मुझे ऐसा ही महसूस हो रहा था कि जैसे मैं अपने जीवन को पहले की तरह ही जी पा रहा हूं। मैं बहुत ज्यादा खुश था और मुझे अकेलापन खा नही रहा था बल्कि अकेलापन ही मेरा दोस्त और साथी बन चुका था। आस-पड़ोस के लोगों से भी मेरी मुलाकात होती रहती थी मैंने उन्हें अपना लिया था और उन लोगों ने भी मुझे अपना मान लिया था। आस पड़ोस के लोग इतने अच्छे थे कि जैसे वह मेरे परिवार के सदस्य हो। मैं लगातार अपने माता पिता को फोन किया करता था ताकि उन्हें मेरी चिंता ना हो और मैं अब पहले की तरह खुश भी था। मेरी खुशी का कारण सिर्फ यही था कि मैं अब अकेला रहने लगा हूं मुझे दार्जिलिंग में काफी समय हो गया था और वहां पर मेरी काफी लोगों से जान पहचान भी हो गई थी।

    दार्जिलिंग मे मेरी काफी लोगों से बातचीत होने लगी थी जब मेरी मुलाकात दार्जिलिंग में सोनिया से हुई तो मुझे ऐसा लगा जैसे सोनिया को मैं जानता हूं। सोनिया से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई कुछ ही समय में मैंने उसे अपने बारे में सब कुछ बता दिया उसे मेरे बारे में जानकर कोई भी दिक्कत नहीं थी उसे इस बात से भी कोई परेशानी नहीं थी कि मैं पहले शादी कर चुका हूं। सोनिया और मैं आपस में हर रोज मिला करते थे वह मुझसे मिलने के लिए घर पर आ जाया करती थी जब वह एक दिन मुझसे मिलने के लिए आई तो मैंने सोनिया को अपने पास बैठने के लिए कहा। वह मुझसे बात कर रही थी मैं सोनिया से बात कर रहा था मुझे सोनिया से बात करना अच्छा लग रहा था। वह मुझे कहने लगी आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं मैं भी सोनिया के हाथ को पकड़कर सहलाने लगा। उसके हाथों को मे सहला रहा था और उसके होठों को मैंने चूमना शुरू कर दिया था सोनिया मुझसे लिपट कर कहने लगी मुझे आपके साथ बहुत अच्छा लग रहा है। मैं उसके होठों को चूम रहा था मैंने बहुत देर तक उसके होठों का रसपान किया उसके नरम होठों से खून बाहर की तरफ को निकाल दिया था। उसकी गर्मी को ना तो मैं झेल पा रहा था और ना ही उसे सोनिया बर्दाश्त कर रही थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से मै सोनिया के बदन को महसूस कर रहा था हम दोनों के बदन से गर्मी बाहर निकलने लगी मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसे हिलाना शुरू किया। काफी देर के बाद सोनिया ने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया और उसे हिलाना शुरू कर दिया वह बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को हिलाती जा रही थी उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने जब सोनिया से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लो तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया।

    वह मेरे लंड को चूसने लगी उसे बहुत अच्छा लग रहा था और काफी देर तक उसने मेरे लंड का रसपान किया मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकालने लगा था और उसे बड़ा मजा आ रहा था। ऐसा उसने बहुत देर तक किया लेकिन जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी तो वह मुझे कहने लगी लगता है अब मैं ज्यादा देर तक रह नहीं पाऊंगी। मैंने सोनिया से कहा रहे तो मैं भी नहीं पा रहा हूं मैंने जब उसके गोरे और सुडौल स्तनों को अपने मुंह के अंदर लेना शुरू किया तो उसे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा मैं उसके स्तनों को बड़े ही अच्छे से अपने मुंह में लेकर चूस रहा था और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। काफी देर तक मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लिया जब उसके स्तनों को मैं अपने मुंह में ले रहा था तो उसकी उत्तेजना में दोगुनी वृद्धि हो गई थी। उसकी योनि पर जब मैंने अपनी उंगली को लगाया तो वह मुझे कहने लगी अब तुम अपने लंड को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवा दो। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और जैसे ही सोनिया की चिकनी चूत के अंदर मैंने अपने लंड को डालना शुरू किया तो मेरा मोटा लंड धीरे-धीरे सोनिया की योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था।

    मेरा लंड जैसे ही सोनिया की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकली और उसी चीख के साथ वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने धीरे धीरे अपनी गति बढ़ानी शुरू कर दी और मैं सोनिया की चूत बडे ही अच्छी तरीके से मार रहा था उसे बहुत ही ज्यादा खुशी हो रही थी और जिस प्रकार से मैं उसकी चूत का आनंद लेता उससे मुझे बहुत ही मजा आता। काफी देर तक ऐसा करने के बाद जब हम दोनों पूरी तरीके से चरम सीमा पर पहुंच गए तो मैंने सोनिया से कहा मैं शायद अब रह नहीं पाऊंगा। मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया सोनिया ने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लेकर चूसना शुरू किया तो उसके मुंह के अंदर बाहर मेरा लंड हो रहा था। काफी देर तक सोनिया ने मेरे लंड को चूसा मैंने सोनिया से कहा अब मेरा वीर्य बाहर गिरने वाला है। सोनिया ने मेरे लंड को बड़े ही अच्छे तरीके से चूसा और उसके बाद मैंने अपने वीर्य को सोनिया के मुंह के अंदर ही गिरा दिया। मैं अभी दार्जिलिंग में रह रहा हूं और अपने जीवन से बहुत खुश हूं।

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