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    गांड मराने की खुशी चेहरे से झलक ऊठी

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    Antavasna, sex stories in hindi: मोहन और मैं घर पर ही थे हम दोनों आपस में बात करने लगे मोहन ने मुझसे कहा कि मैं चाहता हूं कि रोहन को हम लोग पढ़ने के लिए बोर्डिंग स्कूल में भेज दे। मैंने मोहन को कहा लेकिन मैं नहीं चाहती कि रोहन पढ़ने के लिए बोर्डिंग स्कूल में जाए मैं उसे अपने से दूर नहीं भेजना चाहती लेकिन मोहन ने मुझे कहा कि देखो नैना यह कदम तो हम लोगों को उठाना ही पड़ेगा। मैंने मोहन को कहा मोहन देखो हमारे बीच में जो भी हो रहा है उसका असर रोहन पर मैंने कभी भी नहीं पड़ने दिया। मेरे और मोहन के रिश्ते कुछ ठीक नहीं है जिस वजह से हम लोग एक दूसरे से बहुत कम बातें किया करते हैं परंतु जब मोहन ने रोहन को भेजने की बात कही तो मुझे यह बात ठीक नहीं लगी। मैंने मोहन से कहा कि मोहन मुझे इसके लिए थोड़ा सोचने का समय दो मोहन कहने लगे ठीक है नैना जैसा तुम्हें लगता है। मैंने इस बारे में अपनी मम्मी से बात की तो उन्होंने मुझे कहा कि बेटा मोहन बिल्कुल ठीक कह रहा है रोहन को तुम पढ़ने के लिए बोर्डिंग स्कूल में भेज दो।

    मां के कहने पर मैं मोहन की बात मान गई और उनको हम लोगों ने पढ़ने के लिए बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया। हालांकि मैं यह सब बिल्कुल भी नहीं चाहती थी लेकिन अब मैं रोहन को अपने से दूर भेज चुकी थी रोहन मुझसे दूर जा चुका था लेकिन उसके बावजूद भी मैं रोहन के बारे में ही सोचती रहती। मोहन और मेरे बीच में झगड़े की वजह मोहन का परिवार है मोहन के परिवार से मुझे कभी वह प्यार मिला ही नहीं। मोहन की मां चाहती थी कि मोहन की शादी उनके दोस्त की बेटी से हो जाए लेकिन मोहन और मेरे बीच में प्यार पनप रहा था और वह प्यार इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि मोहन मुझसे शादी करने के लिए तैयार थे। मोहन चाहते थे कि हम दोनों की शादी हो जाए और ऐसा ही हुआ मोहन और मेरी शादी तो हो गई लेकिन उसके बाद मुझे नहीं मालूम था कि आगे क्या होने वाला है। मोहन और मेरे बीच कुछ समय तक तो सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन मोहन की मां इस बात से बिल्कुल भी खुश नहीं थी उन्होंने भी आखिरकार अपना रंग दिखाना शुरू कर ही दिया।

    जब मोहन अपने काम के सिलसिले में बाहर होते तो वह मोहन से ना जाने क्या कुछ कहती जिससे कि मोहन और मेरे बीच दूरियां पैदा होती जा रही थी। मैंने मोहन को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन मोहन कहां मेरी बात मानने वाले थे उन्हें तो अपनी मां पर पूरा यकीन था। हालांकि उसके बावजूद भी मैंने बहुत कोशिश की कि हम दोनों के बीच रिश्ते सुधर सके लेकिन ऐसा हो ना सका और हम दोनों के बीच रिश्ते दिन-ब-दिन खराब होते चले गए। आग में घी डालने का काम मोहन की बहन रीना ने किया रीना जब भी घर आती तो मोहन से ना जाने क्या कुछ कहती जिससे कि मोहन बहुत ज्यादा परेशान भी रहने लगे थे और मेरे साथ उनके झगड़े होने लगे। हालांकि मोहन ने मुझे कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी उन्होंने मुझसे जो वादा किया था वह उन्होंने हमेशा पूरा किया है और मुझे भी इस बात की खुशी है कि कम से कम मोहन रोहन से तो बहुत प्यार करते हैं। हम दोनों के रिश्ते बस चलते ही जा रहे थे हमारे रिश्ते का कोई भी मतलब नहीं रह गया था क्योंकि हम दोनों सिर्फ रोहन की वजह से जुड़े हुए थे। मैंने कई बार मोहन से डिवोर्स लेने की बात कही लेकिन मोहन हर बार यह बात कह कर टाल देते कि देखो नैना यदि हम लोग डिवोर्स ले लेंगे तो इससे रोहन पर गलत असर पड़ेगा और मैं इसी परेशानी में थी कि आखिर मुझे क्या करना चाहिए। मैं मोहन से अलग होना चाहती थी लेकिन मैं मोहन से अलग नहीं हो पा रही थी और हमारे अलग ना हो पाने का कारण सिर्फ और सिर्फ रोहन ही था। एक दिन मोहन का मूड बहुत ही अच्छा था वह जब ऑफिस से आए तो उन्होंने मुझे कहा कि नैना आज मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। मैंने मोहन की तरफ देखा और कहा कि आज आपका मूड काफी अच्छा लग रहा है तो मोहन ने मुझे कहा कि हां आज मैं बहुत खुश हूं। मैंने मोहन से पूछा आज आपकी खुशी का कारण क्या है तो वह कहने लगे कि आज मेरी रोहन से बात हुई थी और उसकी कुछ दिनों की छुट्टी पड़ रही है वह घर आ रहा है। मैं चाहती थी कि रोहन जब घर आए तो उसे मेरे और मोहन के द्वारा प्यार मिले, मैंने मोहन से पूछा रोहन कब आ रहा है तो मोहन ने मुझे बताया कि रोहन कल ही आ जाएगा। रोहन 12 वर्ष का हो चुका है रोहान बड़ा होने लगा है इसलिए रोहन की जिम्मेदारी हम दोनों के ऊपर ही है।

    रोहन जब अगले दिन घर आया तो घर में बहुत खुशी थी मैं बहुत खुश थी और मोहन भी उस दिन अपने ऑफिस नहीं गए थे वह घर पर ही थे मैंने मोहन से कहा कि आज हम लोग कहीं चलते हैं तो मोहन ने कहा कि ठीक है आज हम लोग कहीं चलते हैं। काफी समय बाद हम लोग साथ में कहीं गए थे रोहन हम दोनों के बीच की वह कड़ी थी जो हम दोनों को जोड़े हुए थी। हम लोग घूमने के लिए चले गए काफी समय बाद हम लोग साथ में घूम रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था हम लोग सब साथ में बैठे हुए थे तो मैंने रोहन से पूछा कि बेटा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है। रोहन मुझे कहने लगा मम्मी मेरी पढ़ाई तो अच्छी चल रही है रोहन ने मुझे कहा कि मम्मी मुझे अब बोर्डिंग स्कूल में नहीं रहना मुझे आप लोगों के साथ ही रहना है। मैंने रोहन को समझाया तो रोहन मेरी बात मान गया मोहन भी इस बात से खुश थे कि कम से कम मैं रोहन को समझाने में कामयाब रही। हम लोग उस दिन जब घर लौटे तो मेरी मां का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि बेटा तुम कुछ दिन रोहन को लेकर आ जाओ। मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं कुछ दिनों के लिए घर आ जाती हूं रोहन भी कुछ दिनों के लिए घर पर ही था तो मैं चाहती थी कि उसे लेकर कुछ दिनों के लिए  अपने मायके चली जाऊं।

    मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई रोहन मेरे साथ आ गया और जब रोहन मेरे साथ आया तो मेरी मां बहुत ज्यादा खुश थी वह कहने लगी कि रोहन कितना बड़ा हो चुका है। मैंने मां से कहा मां रोहान अब 12 वर्ष का हो चुका है मां ने रोहन के सामने मेरे और मोहन के बीच के झगड़ों के बारे में कुछ भी बात नहीं की लेकिन जब रोहन सोया हुआ था तब मां मेरे और मोहन के बीच के झगड़ों के बारे में बात कर रही थी। मैंने मां से कहा मां देखो हम लोग यदि इसके बारे में भूल जाए तो ही ठीक रहेगा मैं नहीं चाहती की रोहन हमारी हो बात सुन ले। मां ने कहा कि ठीक है बेटा मैं इस बारे में बात नहीं करूंगी। मैं अपने मायके में ही थी और रोहन के साथ समय बिताकर मुझे अच्छा लग रहा था मोहन का मुझे फोन आया वह कहने लगे क्या कल घर आ सकती हो? मैंने मोहन को कहा ठीक है मैं कल घर आ जाऊंगी। मेरे अंदर की आग मोहन बुझा नहीं पाते थे हमारे पड़ोस में ही राजीव नाम का लड़का रहता है जो अक्सर मुझे देखा करता था एक दो बार उसने अपने हाथ मेरे बदन पर फेर भी दिए थे। मैं चाहती थी कि राजीव मुझे देखे और मैं उसके साथ इच्छा को पूरा कर सकूं राजीव रात के वक्त मुझे दिखाई दिया और मै राजीव को देख रही थी। मैं उस वक्त छत पर ही थी मां रोहन के साथ बैठ कर बात कर रही थी। राजीव ने मुझे अपनी छत पर बुला लिया मैं राजीव की छत पर चली गई जब मैं वहां पर गई तो उस वक्त राजीव ने मुझे देखते ही अपनी बाहों में भर लिया और मेरी जांघ को वह दबाने लगा उसने मुझे नीचे लेटा दिया और मेरे ऊपर से लेट कर वह मेरे होठों को चूम रहा था। मोहन और मेरे बीच ना जाने कब से सेक्स संबंध बने ही नहीं थे इसलिए मैं राजीव के साथ अपनी चूत मरवाकर अपनी चूत की खुजली को मिटाना चाहती थी।

    राजीव मेरे कपड़ों को उतारकर मेरे स्तनों का रसपान करने लगा वह मेरे स्तनों को बड़े ही अच्छे तरीके से अपने मुंह में लेकर चूस रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था वह जिस प्रकार मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था। काफी देर तक उसने ऐसा ही किया लेकिन जब उसने अपने लंड को चूत पर रगड़ना शुरू किया तो मेरी चूत से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था मैंने उसे कहा तुम मेरी चूत को चाट लो। राजीव मेरी चूत को चाटने लगा जिस प्रकार से वह चूत को चाट रहा था उससे मेरी चूत से पानी बाहर निकलने लगा उसने अपने लंड को मेरी चूत पर लगाया जैसे ही उसने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डालना शुरू किया तो मैंने उसे कहा कि मुझे बड़ा मजा आ रहा है। वह मुझे पूरी ताकत के साथ चोद रहा था उसने मुझे बहुत देर तक चोदा उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और मेरी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को वह किए जा रहा था।

    मैंने भी उसकी कमर पर अपने नाखूनों के निशान मार दिए अब वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुका था उसका वीर्य उसके अंडकोष के बाहर तक आ चुका था इसलिए उसने अपने वीर्य को मेरी योनि के ऊपर ही गिरा दिया। मेरी योनि के ऊपर उसका वीर्य गिरा तो उसने मेरी योनि से वीर्य को साफ करते हुए मुझे घोड़ी बना दिया। मुझे घोडी बनाते ही उसने मेरी गांड को चाटना शुरु किया और मेरी गांड के अंदर उसने अपने लंड को डाला तो मैं चिल्ला उठी उसका लंड मेरी गांड के अंदर तक जा चुका था। शादी के इतने वर्षों बाद पहली बार अपनी गांड मरवाने की खुशी मुझे इतनी ज्यादा हो रही थी कि मैं उससे अपनी चूतड़ों को टकराए जा रही थी और वह मुझे धक्के मार रहा था। उसने मुझे बहुत देर तक धक्के मारे जब मेरी गांड से खून बाहर की तरफ को निकलने लगा तो मैंने उसे कहा मुझे लगता है मैं ज्यादा गर्मी झेल नहीं पाऊंगी उसने मुझे कहा कि मेरा वीर्य पास गिरने वाला है। उसने अपने लंड को तेजी से अंदर बाहर करना शुरु किया उसे बड़ा ही मजा आ रहा था। मेरी गांड और उसके लंड से जो गर्मी पैदा हो रही थी वह हम दोनो झेल ना सके और उसने अपने वीर्य को मेरी चूतड़ों के अंदर ही गिरा दिया मैं खुश हो गई मैं जब अगले दिन अपने ससुराल लौटी तो मोहन मुझे कहने लगे आज तुम बडी खुश नजर आ रही हो? मैंने उन से कहा बस ऐसी ही मुझे आज बहुत अच्छा लग रहा है।

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