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    भाभी के बिना कहीं दिल नहीं लगता

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    Bhabhi sex story, desi kahani: मेरी और माला की शादी को अभी सिर्फ 6 माह ही बीते थे माला एक अच्छे परिवार से आती है इस वजह से माला के पिताजी ने उसे कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी और मेरी भी पूरी कोशिश यही थी कि मैं माला को कभी कोई कमी महसूस ना होने दूँ। जब माया और मेरी शादी की बात चल रही थी तो उस वक्त हमारी शादी की बात से कोई भी खुश नहीं था मेरा घर इतना ज्यादा बड़ा नहीं है लेकिन उसके बावजूद भी मैंने माला से शादी करने का फैसला कर लिया था। माला और मेरी पहली मुलाकात बस स्टॉप पर हुई थी माला बस का इंतजार कर रही थी हम दोनों उसी बस में चढ़े और साथ में बैठने की वजह से मेरी और माला की बात हो गई। जब हम दोनों की बात हुई तो बात अब आगे बढ़ने लगी थी पहली मुलाकात में ही हम दोनों ने एक दूसरे से नंबर ले लिया था जिस वजह से मेरी और माला की बात होती रही। मैं उस वक्त माला के पिताजी को नहीं जानता था माला के पिताजी एक बड़े अधिकारी हैं और उसकी मां भी एक बड़ी अधिकारी हैं जिस वजह से माला को कभी भी उन लोगों ने कोई कमी महसूस नहीं होने दी।

    हम दोनों का रिश्ता अब आगे बढ़ने लगा था मैंने माला से शादी का प्रस्ताव रखा तो माला भी इस बात से खुश हो गई। जब मैंने माला के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था तो अपने माता-पिता से मैंने इस बारे में बात नहीं की थी मुझे नहीं पता था कि जब हम दोनों की शादी हो जाएगी तो उसके बाद मेरे सामने कितनी सारी समस्याएं आन पड़ेगी। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि माला के मेरे जीवन में आने से मेरी परेशानियां कुछ ही महीनों में बढ़ जाएंगे। माला और मेरी शादी के वक्त माला के पिताजी ने हम लोगों को काफी दहेज दिया मेरा घर छोटा था इसलिए सामान को जैसे-तैसे घर में घुसाना पड़ा। मैं दहेज के बिल्कुल खिलाफ था लेकिन माला के पिताजी ने कहा कि बेटा हम लोग अपनी बेटी को जो दे रहे हैं अपनी मर्जी से दे रहे है हमने अपनी बेटी को बड़े लाड प्यार से पाला है। मेरे पास भी शायद अब कोई और जवाब नहीं था इसलिए मैंने वह सामान रख लिया कुछ महीने तक तो हम दोनों की जिंदगी बड़े ही अच्छे से चलती रही हम दोनों एक दूसरे के प्यार में डूबे रहते। मुझे बहुत ही खुशी थी कि कम से कम मेरी शादी माला के साथ हो गई है लेकिन शादी के एक महीने बीत जाने के बाद जब माला और मेरे बीच में अनबन शुरू हुई तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था की माला मेरे साथ इस प्रकार का व्यवहार करती है मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि माला और मेरे बीच झगड़े होंगे।

    एक दिन मैं अपने ऑफिस से लौटा तो उस वक्त मेरी मां कहने लगी कि रोहित बेटा आज माला ने कुछ खाया नहीं है तुम उससे पूछ लो क्या वह खाना खाएगी। मैंने मां से कहा लेकिन माला ने आज क्यों खाना नहीं खाया तो मां ने कोई भी जवाब नहीं दिया। मैंने जब माला से इस बारे में पूछा तो माला ने भी मुझे कोई जवाब नहीं दिया मेरा गुस्सा भी अब बढ़ चुका था और मैंने गुस्से में माला से पूछा कि आखिर क्या बात हुई है तो माला ने मुझे सब कुछ बताया और कहने लगी आज तुम्हारी बहन के साथ मेरा झगड़ा हुआ। मेरी तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए क्योंकि मेरे पास अब कोई और जवाब भी तो नहीं था माला से मैंने अपनी मर्जी से शादी की थी। माला भी अपने माता पिता के पैसों का रोप हमेशा ही मुझे दिखाती रहती वह हमेशा ही मेरे अंदर कमी निकालती और कहती कि मेरे मम्मी पापा ने तो कभी मुझे किसी भी चीज के लिए कोई कमी महसूस नहीं होने दी। हम दोनों के रिश्ते में दूरियां पैदा होती जा रही थी लेकिन मैं फिर भी कोशिश करता कि हम दोनों एक दूसरे के साथ खुश रहने की कोशिश करें। महीने का पहला ही दिन था मैंने माला से कहा कि माला आज हम लोग घूमने के लिए चले तो माला मेरी बात मान गई और हम लोग घूमने के लिए तैयार हो गए मुझे लगा की माला को आज मैं कुछ गिफ्ट दिलवा दूँ मैं अपने मन में यही सोच रहा था। जब हम लोग शॉपिंग मॉल में गए तो वहां पर मैंने माला से कहा कि माला तुम्हे क्या खरीदना है तो माला ने मुझे कहा कि मैं चाहती हूं कि तुम मेरे लिए साड़ी ले लो। जब मैंने उस साड़ी पर लगे हुए टैग को देखा तो उसमें कीमत बहुत ज्यादा थी मैंने माला से कहा माला यह मेरे बजट से बाहर है लेकिन माला को तो वही साड़ी चाहिए थी और माला इसी बात पर मुझसे गुस्सा हो गई।

    मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए फिर मैंने वह सारी तो खरीद ली लेकिन मेरे तनख्वाह में से आधे पैसे तो साड़ी को खरीदने में ही चले गए। मैं अब मैं परेशान इस बात से रहने लगा था कि माला का व्यवहार मेरे साथ कुछ ठीक नहीं था और हर रोज वह मुझसे झगड़ने लगी थी। एक दिन माला गुस्से में अपना सामान लेकर अपने मायके चली गई मैंने माला को फोन किया लेकिन माला फोन नहीं उठा रही थी मुझे भी अब अपनी गलती का एहसास होने लगा था कि मुझे माला के साथ शादी नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि मैं माला को खुश नहीं रख पा रहा था। माला के माता पिता ने उसकी खुशी का हमेशा से ही ध्यान दिया है लेकिन मैं उसकी खुशी का बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पा रहा था इसी वजह से तो माला और मेरे बीच में झगड़े होने शुरू हो गए थे। मैं भी इन झगड़ों से परेशान आ चुका था मैंने माला को कई बार फोन करने की कोशिश की लेकिन माला ने मेरा फोन ही नहीं उठाया। मेरी मां भी इस बात से चिंतित थी और वह कहने लगी कि बेटा तुम जाकर माला को ले आओ मैंने मां से कहा ठीक है मां।

    मैं माला के घर पर गया तो मैंने माला के पिता जी से इस बारे में बात की वह मुझे कहने लगे कि बेटा मैंने तो तुम्हें पहले ही इस बारे में कह दिया था कि हम लोगों ने माला को बड़े ही लाडो प्यारों से पाला है और हमने कभी भी उसे किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी। मैंने उन्हें समझाया और कहा देखिए मेरी इतनी तनख्वाह नहीं है कि मैं माला की हर एक जरूरतों को पूरा करता रहूं लेकिन उसके बावजूद भी मुझसे जितना बन पड़ता है उतना मैं करता हूं। उन्होंने मुझे कहा कि तुम माला से ही बात कर लो मैंने माला से बात की लेकिन माला से बात करना मेरा व्यर्थ था मैं भी गुस्से में अपने घर चला आया। कुछ ही समय में हम दोनों के बीच बहुत दूरियां पैदा हो गई थी इसी दूरी के चलते मैं अपने पड़ोस में रहने वाली भाभी जिनका नाम कावेरी है उनकी तरफ खिंचा चला गया। कावेरी भाभी को यह बात अच्छे से मालूम थी कि मेरे और माला के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है इसीलिए भाभी ने इस बात का फायदा उठाया और मुझे भी कहीं ना कहीं उनकी जरूरत थी। मैं जब उनके साथ उनके घर पर अकेला था तो उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि रोहित तुम चिंता मत करो मैं हूं ना मैं सब कुछ ठीक कर दूंगी। मैंने भी भाभी की कोमल जांघ पर हाथ रखा और उनकी जांघों को सहलाने लगा। जब मैंने उनकी साड़ी को ऊपर करते हुए उनकी चूत की तरफ से देखा तो उन्होंने पैंटी नहीं पहनी हुई थी उनकी चूत के अंदर मैंने अपनी उंगली को डाल दिया उनकी चूत में उंगली जाते ही वह कहने लगी तुम यहां क्या कर रहे हो? मैंने उन्हें वहीं बिस्तर पर लेटा दिया और उनकी चूत को मैं चाटने लगा मैं जब उनकी चूत को चाट रहा था तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और उनकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर की तरफ निकल रहा था। मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर डाला और उनके ब्लाउज के हुक को खोलते हुए मैंने उनके ब्लाउज को उतार फेंका और मै उनकी ब्रा को भी उतार चुका था मैं उनके स्तनों को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान कर रहा था और उनकी चूत के अंदर बाहर मे अपने लंड को आसानी से कर रहा था उनकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड बड़ी आसानी से हो रहा था वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी मेरा वीर्य उनकी चूत के अंदर जा चुका था।

    वह कहने लगी तुमने अपने वीर्य को बड़ी जल्दी बाहर निकाल दिया। मैंने उन्हें कहा भाभी जी यह सब मेरे बस में थोड़ी है आप इतनी माल है आपके साथ में ज्यादा देर तक सेक्स ना कर सका। उनकी बड़ी गांड को देखकर मै उनकी गांड मारना चाहता था मैने भाभी से इस बारे में बात की तो वह मुझे कहने लगी तुम अपने लंड पर तेल की मालिश कर लो। मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश की और अपने लंड को पूरी तरीके से चिकना बना दिया तेल की कुछ बूंदों को मैंने भाभी की गांड के अंदर भी डाल दिया। अब मैंने भाभी की गांड के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया और जब मेरा लंड भाभी की गांड के अंदर चला गया तो वह चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी थोड़ा और तेजी से धक्के मारो। मैंने उन्हें और भी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए मैं उनको बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था मुझे धक्के मारने में बहुत मजा आ रहा था वह मुझसे चूतडो को मिलाया जा रही थी जिस प्रकार से वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिला रही थी उस से उनकी गांड के अंदर तक मेरा लंड जा रहा था।

    मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था जब मेरा लंड उसकी गांड के अंदर बाहर होता तो मुझे बहुत ज्यादा मजा आता। वह भी अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही थी और मुझे कहने लगी मेरी गांड से बहुत ज्यादा गर्मी बाहर निकल रही है। मैंने उन्हें कहा लेकिन भाभी जी मुझे तो बहुत मजा आ रहा है, मैं अपनी सारी परेशानी भूल कर कावेरी भाभी की गांड मारना मैं लगा हुआ था मुझे बहुत ज्यादा मजा भी आ रहा था। जब भाभी की गांड और लंड की रगडन से जो गर्मी पैदा होने लगी उसे हम दोनों ही ना झेल सके जैसे ही मैंने अपने वीर्य को भाभी की गांड के अंदर गिराया। वह कहने लगी रोहित तुमने मुझे पूरी तरीके से हिला कर रख दिया मैंने उन्हें का भाभी जी आप तो कसम से बड़ी लाजवाब हैं आपको चोदकर आज मजा ही आ गया। मैं माला के बारे में भूलने लगा था उसे अपनी गलती का एहसास हुआ वह खुद-ब-खुद घर लौट आई लेकिन मै कावेरी भाभी के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाता था।

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