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    भाभी गिर ही गया वीर्य

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    Antarvasna, hindi sex story: दो वर्ष पूर्व मैं जॉब करने के लिए हैदराबाद चला गया था जब मैं हैदराबाद गया तो मैं हैदराबाद में ही जॉब करने लगा। हैदराबाद में जॉब करने के दौरान मेरी मुलाकात रोहित से हुई रोहित और मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई। कुछ दिनों के लिए मैं अपने घर नागपुर लौट आया था मैं कुछ दिनों की छुट्टी लेकर नागपुर आया था मैं चाहता था कि थोड़ा समय अपने परिवार के साथ बिताऊं। पापा मम्मी इस बात से बहुत खुश थे मैंने उन लोगों के साथ में काफी अच्छा समय बिताया नागपुर में ही मुझे मेरी क्लास में पढ़ने वाली मीनाक्षी मिली। मीनाक्षी को मैंने काफी वर्षों बाद देखा था मैंने मीनाक्षी को देखते ही कहा की मीनाक्षी तुम कैसी हो तो वह कहने लगी विराज मैं तो ठीक हूं लेकिन तुम काफी वर्षों से दिखाई नहीं दिए। मैंने उसे कहा मैं हैदराबाद में रहता हूं और वहीं पर मैं जॉब करता हूं मीनाक्षी ने मुझे बताया कि उसके पति भी हैदराबाद में ही रहते हैं मैंने उसे कहा चलो यह तो बहुत अच्छी बात है। मैंने जब मीनाक्षी से उसके पति के बारे में पूछा तो मीनाक्षी कहने लगी कि वह बहुत ही अच्छे हैं और मेरा ध्यान बहुत अच्छे से रखते हैं।

    मैंने मीनाक्षी को कहा तुम्हारी शादी कब हुई वह मुझे कहने लगी कि मेरी शादी को हुए एक वर्ष हो चुका है मैंने मीनाक्षी को कहा तुमने अपनी शादी के बारे में किसी को भी नहीं बताया। मीनाक्षी कहने लगी कि मैंने अपनी शादी के बारे में किसी को भी कुछ नहीं बताया मैंने मीनाक्षी को कहा लेकिन तुमने अपनी शादी के बारे में किसी को क्यों नहीं बताया। मिनाक्षी कहने लगी कभी फुर्सत में मैं तुम्हें यह बात बताऊंगी मैंने मीनाक्षी को कहा ठीक है और यह कहते हुए मैं मीनाक्षी को कहने लगा अभी मैं चलता हूं तुमसे मैं बाद में मुलाकात करूंगा। मैंने मीनाक्षी का नंबर ले लिया और मीनाक्षी को कहा मैं तुम्हें फोन करूंगा तो मीनाक्षी कहने लगी ठीक है और फिर मैं अपने घर लौट आया था। जब मैं अपने घर लौट आया तो उस वक्त पापा भी अपने ऑफिस से लौट चुके थे पापा मुझे कहने लगे कि बेटा विराज आज का दिन तुम्हारा कैसा रहा। मैंने पापा को बताया आज मुझे मेरी क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की मिली थी पापा कहने लगे चलो यह तो बहुत अच्छी बात है। मैं कुछ दिनों बाद ही वापस हैदराबाद लौटने वाला था इसी दौरान मुझे रोहित का फोन आया और रोहित कहने लगा कि विराज तुम कब लौट रहे हो।

    मैंने रोहित को कहा मुझे आने में थोड़ा समय लग जाएगा मेरी और रोहित की 10 मिनट तक बात हुई मैंने फिर फोन रख दिया था। मैंने पापा से कहा पापा क्या कल आपके ऑफिस की छुट्टी है तो पापा कहने लगे हां बेटा कल तो रविवार है कल मैं घर पर ही रहूंगा। मैंने पापा को कहा पापा कल हम लोग कहीं घूम आते हैं तो पापा कहने लगे ठीक है बेटा तुम देख लो जैसा तुम्हें ठीक लगता है। मैंने घूमने का प्लान बना दिया था और अगले ही दिन हम लोग घूमने के लिए चले गए। सबके साथ में अच्छा समय बिता कर मुझे बहुत अच्छा लगा पापा और मम्मी के साथ काफी समय बाद मैं इतना अच्छा समय बिता पा रहा था। शाम के वक्त हम लोग घर लौट आए थे और उसके अगले ही दिन मैंने मीनाक्षी को फोन किया तो मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि विराज क्या तुम मुझसे मिल सकते हो। मैंने मीनाक्षी को कहा ठीक है मैं तुमसे मिलता हूं और मैं अगले ही दिन मीनाक्षी को मिला। मैं जब मीनाक्षी को मिला तो मीनाक्षी ने उस दिन मुझसे बात की और अपनी शादी के बारे में बताया। मीनाक्षी ने बताया कि उसके पति और उसने कोर्ट मैरिज की है क्योंकि उन लोगों के परिवार वाले शादी के लिए तैयार नही थे तो इस वजह से उन लोगों ने कोर्ट मैरिज की। जब मीनाक्षी ने मुझे यह बात बताई तो मैंने मीनाक्षी को कहा कभी तुम मुझे अपने पति से जरूर मिलाना वह कहने लगी ठीक है। हम लोग काफी समय तक एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे उसके बाद मीनाक्षी भी अपने घर चली गई और मैं भी अपने घर लौट आया था। मुझे हैदराबाद जाना था इसलिए मैं अपने सामान की पैकिंग करने लगा मम्मी ने मेरी मदद की और मम्मी ने मुझे कहा कि विराज बेटा तुम यहीं कोई जॉब क्यो नहीं देख लेते। मैंने मम्मी को कहा मम्मी हैदराबाद में मुझे एक अच्छी कंपनी में जॉब मिली है और मैं यहां पर कैसे जॉब कर सकता हूं मैं चाहता हूं कि मेरा भविष्य बने इसलिए तो मैं उस कंपनी में जॉब कर रहा हूं।

    मां को समझाना थोड़ा मुश्किल जरूर था लेकिन मैंने उन्हें समझा लिया था पापा इस बात को अच्छे से जानते थे कि हैदराबाद में जॉब कर के मैं अपने सपनों को पूरा कर रहा हूं। अगले दिन पापा और मम्मी दोनों ही मुझे छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन तक आये जब वह लोग मुझे रेलवे स्टेशन तक छोड़ने के लिए आए तो पापा मम्मी मुझे कहने लगे कि बेटा तुम अपना ध्यान रखना। मैंने उन्हें कहा हां बिल्कुल मैं अपना ध्यान रखूंगा, ट्रेन चलने लगी थी सफर का पता ही नहीं चला कि कब मैं हैदराबाद पहुंच गया। जब मैं हैदराबाद पहुंचा तो रोहित मुझे लेने के लिए रेलवे स्टेशन पर आया हुआ था उस दिन ऑफिस की छुट्टी थी इसलिए रोहित ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें लेने के लिए स्टेशन पर आ जाऊंगा। वह जब मुझे दिखाई दिया तो हम दोनों उसके बाद वहां से घर लौटे मैंने रोहित को कहा ऑफिस कैसा चल रहा है। रोहित कहने लगा कि ऑफिस तो ठीक ही चल रहा है और ऑफिस में कल ही नये मैनेजर आए हैं वह बड़े सख्त मिजाज हैं मैंने रोहित को कहा कोई बात नहीं। हम लोग साथ में बैठे हुए थे तो रोहित ने मुझे बताया कि उसकी बहन की सगाई हो चुकी है और वह कुछ दिनों के लिए घर जाने वाला है।

    मैंने रोहित को कहा चलो यह तो बहुत खुशी की बात है कि तुम्हारी बहन की सगाई हो चुकी है रोहित मुझे कहने लगा कि शादी में तुम्हें भी तो आना है। मैंने रोहित को कहा ठीक है दोस्त मैं तुम्हारी बहन की शादी में जरूर आऊंगा हम दोनों बात कर रहे थे कि तभी हमारी डोर बेल बजी, जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो मैंने देखा सामने एक व्यक्ति खड़े थे। वह कहने लगे बेटा क्या आप यहीं रहते हैं? मैंने उन्हें कहा हां अंकल हम लोग यहीं रहते हैं। उन्होंने मुझे कहा कल सोसाइटी में एक छोटी सी पार्टी रखी है उसमें आप लोग भी आ जाइएगा। मैंने उन्हें कहा ठीक है और फिर अंकल जा चुके थे। मैंने दरवाजा बंद कर दिया मैंने रोहित को यह बात बताई तो रोहित कहने लगा ठीक है कल हम लोग पार्टी में जरूर जाएंगे। रोहित और मैं जब पार्टी हॉल में गए तो मैंने देखा वहां पर काफी भीड़ थी, हम दोनो किसी को भी नहीं जानते थे लेकिन फिर भी हम लोग वहां चले गए। हम लोग एक कोने में बैठे हुए थे तभी मैंने आगे से देखा एक भाभी साड़ी पहने में आ रही है वह साड़ी में इतनी ज्यादा सेक्सी और हॉट लग रही थी कि उन्हें देखकर मेरा लंड उनकी चूत में जाने को तैयार था मैं उनको चोदना चाहता था। मुझे नहीं पता था शायद मेरी किस्मत इतनी अच्छी होने वाली है मैं उन भाभी की तरफ देख रहा था तो वह भी मेरे पास आई और मुझसे बात करने लगी। उन्होंने मुझसे पूछा तुम कहां रहते हो? मैंने उन्हें अपने बारे में बताया और मैं उनसे बात करने लगा भाभी का नाम कविता है कविता भाभी को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था। मैंने उन्हें कहा भाभी आप हमे अपने घर पर बुलिए। वह कहने लगी मेरे घर पर तो बुलाना संभव नहीं है लेकिन मैं आपके पास जरूर आ सकती हूं। जब उन्होने यह बात कही तो मैंने भी भाभी को अपने पास बुला लिया जब वह आई तो उस दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी। रोहित ऑफिस में था मैं घर पर ही था। मैंने भाभी को अपनी गोद में बैठा लिया जब वह मेरी गोद में बैठी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उन्होंने मुझे कहा कि चलो हम लोग एक दूसरे के साथ मजे करते हैं। मैंने उन्हे कहा भाभी इतनी भी क्या जल्दी है अब मैं उनके स्तनों को दबाने लगा उनके स्तन बडे ही टाइट है।

    मैं सिर्फ उनकी गांड मारना चाहता था मैंने उनके स्तनों को बहुत देर तक अपने मुंह में लेकर चूसा। जब मै उनके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था तो मुझे बहुत मजा आ रहा था वह भी मेरे लंड को अपने मुंह में लेने के लिए उत्सुक बैठी हुई थी उन्होंने जैसे ही मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो मैंने उन्हें कहा भाभी कसम से मजा आ रहा है ऐसे ही आप मेरे लंड को चूसती रहो। मेरी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा था और ना ही भाभी अपनी गर्मी को रोक पा रही थी। मैंने उन्हें वहीं सोफे पर लेटा दिया और उनके कपड़े उतारते हुए जब मैंने उनकी पैंटी को उतारा तो उनकी चूत से तरल पदार्थ निकल रहा था। मैने अपने लंड को अंदर घुसा दिया मेरा लंड उनकी चूत के अंदर तक जा चुका था। मै उनकी चूत के मजे उठा रहा था उससे मुझे बहुत मजा आ रहा था मैं लगातार उन्हें धक्के मार रहा था मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मुझे उनको चोदने में बहुत मजा आया।

    मैं चाहता था मै अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर करता रहूं मेरा वीर्य गिरने ही वाला था और जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मैंने उन्हें कहा भाभी आज तो मजा आ गया। थोड़ी ही देर बाद उन्होंने मेरे लंड को दोबारा से सकिंग करना शुरू किया और जिस प्रकार से उन्होंने मेरे लंड को सकिंग किया मेरा लंड खड़ा हो चुका था मैंने उनकी गांड मे लंड घुसाते हुए अंदर की तरफ डाला। मेरे लिए यह इतना आसान होने वाला नहीं था उनकी गांड का छेद बहुत टाइट था परंतु मैंने भी उनको धक्के दिए मेरा लंड उनकी गांड के अंदर तक जा चुका था। उनकी गांड के अंदर मेरा लंड जाते ही वह चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है मैं उनकी गांड के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था तो मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैने जिस प्रकार से उनकी गांड के अंदर बाहर अपने लंड को किया उससे हम दोनों ज्यादा देर तक एक दूसरे की गर्मी को ना झेल सके और मेरा वीर्य दोबारा से भाभी की गांड के अंदर गिर चुका था। मेरा वीर्य गिरा तो भाभी मुझे कहने लगी अब तो तुम्हारे पास आना ही पड़ेगा। कविता भाभी को जब भी मेरी जरूरत पड़ती तो मुझे कहती कि मैं तुम्हारे पास आना चाहती हूं और वह मेरे पास आ जाया करती और मैं उनकी चूत और गांड दोनों की ही मजे लिया करता।

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