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    दोस्त मेरी पत्नी का ख्याल रखना

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    Antarvasna, hindi sex story:

    Dost meri patni ka khayal rakhna मैं और दीपिका मेरे दोस्त रोहन के घर पर जाते हैं रोहन ने हम लोगों को घर पर बुलाया था और रोहन ने हम लोगों की बड़ी अच्छे से खातिरदारी की। रोहन और मैं साथ में  बैठे हुए थे रोहन ने मुझे कहा  आदित्य मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुका हूं मैंने रोहन से उसकी परेशानी का कारण पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि उसके परिवार में आजकल कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। रोहन अपने परिवार से दूर मुंबई में रह रहा था रोहन को अपने माता-पिता की चिंता सता रही थी। रोहन मुझे कहने लगा कि मेरे चाचा जी मेरे पापा को हमारी एक पुश्तैनी प्रॉपर्टी के लिए बड़ा परेशान कर रहे हैं जिस वजह से हम लोगों के बीच में काफी वर्षों से झगड़ा चल रहा है लेकिन अभी तक वह झगड़े का कोई हल नहीं निकल पाया है। मैंने रोहन को कहा क्या तुम ने इस बारे में अपने चाचा जी से बात नहीं की तो रोहन मुझे कहने लगा कि चाचा जी से तो कई बार हम लोगों ने इस बारे में बात कर ली है लेकिन उन्हें लगता है कि उन्हें उनका हिस्सा पूरी तरीके से नहीं मिल पा रहा है इस वजह से वह आए दिन पापा से झगड़ते रहते हैं और हम लोगों के बीच में रिश्ते कुछ ठीक नहीं है। रोहन और मैं इस बारे में बात कर रहे थे कि तभी रोहन की पत्नी दिव्या कहने लगी कि आइये आप लोग खाना खा लीजिए।

    हम दोनों अब डिनर टेबल पर बैठकर बात कर रहे थे हम चारों ने जब खाना खा लिया तो उसके बाद हम लोग थोड़ी देर तक साथ में बैठे रहे फिर मैंने रोहन से कहा रोहन अभी हम लोग चलते हैं और हम लोग वापस अपने घर के लिए लौट आए। जब हम लोग रास्ते में आ रहे थे तो दीपिका मुझसे कह रही थी कि दिव्या ने खाना बहुत अच्छा बनाया था मैंने दीपिका से कहा हां दिव्या ने खाना तो बहुत अच्छा बनाया था और वह उनकी बड़ी तारीफ कर रही थी। मैंने दीपिका से कहा रोहन बहुत ही नेक और अच्छा इंसान है लेकिन उसके पारिवारिक परेशानियों की वजह से आजकल वह थोड़ा परेशान है। दीपिका जानना चाहती थी कि आखिर रोहन की क्या परेशानी है मैंने दीपिका को इस बारे में बताया कि उनके घर में कोई पुश्तैनी प्रॉपर्टी है जिस वजह से उसके पिताजी और उसके चाचा के बीच उस प्रॉपर्टी को लेकर आज तक झगड़ा है। हम दोनों बात कर ही रहे थे की इतने में हम लोग घर पहुंच गए हमें पता ही नहीं चला कि कन बातों बातों में सफर कट गया।

    हम लोग घर पहुंचे तो मेरे पापा मम्मी हम लोगों का इंतजार कर रहे थे उन्होंने कहा कि बेटा तुम लोगों को आने में बड़ी देर हो गई तो मैंने उन्हें कहा हां पापा आने में थोड़ा देर हो गई। दीपिका और मेरी शादी को हुए अभी दो वर्ष ही हुए हैं और हम दोनों की शादी शुदा जिंदगी बड़े ही अच्छे से चल रही है। अगले दिन जब मैं रोहन को ऑफिस में मिला तो रोहन मुझे कहने लगा कि आदित्य मैं सोच रहा हूं कि मैं एक घर मुंबई में खरीद लूं। मैंने उसे कहा लेकिन यहां पर घर खरीदना इतना आसान भी नहीं है वह कहने लगा कि वह तो तुम ठीक कह रहे हो लेकिन आज सुबह ही मेरे पिताजी का मुझे फोन आया था और वह मुझे कह रहे थे कि उनके और चाचा के बीच में अब समझौता हो चुका है और वह लोग प्रॉपर्टी बेचने के लिए तैयार हैं पिताजी चाहते हैं कि उस प्रॉपर्टी से जो पैसा मिलेगा उससे मैं अपने लिए घर खरीद लूं। मैंने रोहन को कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है रोहन कहने लगा मुझे लगता है कि अब हम लोगों को किसी बिल्डर से बात करनी चाहिए। मैंने रोहन को कहा मेरे पहचान में एक बिल्डर है यदि तुम कहो तो मैं उनसे बात कर लूं तो रोहन कहने लगा कि हां हम लोग उनसे बात कर सकते हैं यदि तुम्हारे पास समय हो तो हम लोग उनसे मिल भी सकते हैं। मैंने रोहन को कहा ठीक है हम लोग उनसे मिल भी लेंगे और हम लोग जब उनसे मिले तो उन्होंने हमें अपने नए प्रोजेक्ट के बारे में बताया। जब उन्होंने हमें अपने फ्लैट दिखाए तो रोहन ने कहा कि हां यहां पर ठीक रहेगा रोहन के बजट में वह फ्लैट भी था तो रोहन ने उन्हें कुछ बुकिंग अमाउंट दे दिया और उसके बाद कुछ ही समय बाद रोहन ने उन्हें पूरी रकम दे दी। रोहन की पुश्तैनी प्रॉपर्टी बिक चुकी थी इस वजह से रोहन ने नया फ्लैट खरीद लिया था जब उन्होंने वह फ्लैट खरीदा तो रोहन के माता-पिता भी उस वक्त मुंबई आए हुए थे उनसे मैं पहली बार ही मिल रहा था उनसे मेरी यह पहली ही मुलाकात थी। रोहन चाहता था कि वह अपने घर खरीदने की खुशी में एक छोटी सी पार्टी दे रोहन ने जब एक होटल में पार्टी का अरेंजमेंट किया तो वहां पर उसने हमारे कुछ ऑफिस के दोस्तों को भी बुलाया था और उनके परिवार वाले भी वहां पर आने वाले थे।

    रोहन और मैंने ही सारी जिम्मेदारी को संभाला था और उसके बाद जब पार्टी शुरू हुई तो हमारे ऑफिस के दोस्त और उनके परिवार वाले आने लगे थे। मैंने रोहन से कहा रोहन मैं भी दीपिका को ले आता हूं तो रोहन कहने लगा कि ठीक है तुम भी दीपिका भाभी को ले आओ और आते हुए दिव्या को भी ले आना मैंने रोहन से कहा ठीक है मैं आते हुए दिव्या को भी ले आऊंगा। मैं अपने घर के लिए निकल चुका था लेकिन रास्ते में काफी ट्रैफिक था परंतु फिर भी मैं जल्दी घर पहुंच गया क्योंकि जिस होटल में हम लोगों ने व्यवस्था की थी वहां से कुछ दूरी पर ही मेरा घर है। जब मैं घर पहुंचा तो दीपिका तैयार थी मैंने दीपिका से कहा कि दीपिका हम लोगों को कुछ ले लेना चाहिए हम लोगों ने गिफ्ट ले लिया। मैं दिव्या को लेने के लिए उसके घर पहुंचा तो दिव्या भी तैयार थी मैंने दिव्या से कहा जल्दी से तुम बैठ जाओ तो दिव्या कार में बैठ गई और हम लोग जल्दी से होटल में पहुंचे जब हम लोग होटल में पहुंचे तो वहां पर काफी लोग आ चुके थे।

    रोहन ने मुझे कहा तुम बिल्कुल सही वक्त पर आए मुझे तो लगा था कि तुमको आने में देर हो जाएगी मैंने रोहन को कहा पहले तुम मुझे भी यही लगा था क्योंकि रास्ते में बहुत ज्यादा ट्रैफिक था लेकिन मैं जल्दी ही आ गया। अब रोहन के मम्मी पापा और सब लोग पहले से ही वहां पर मौजूद थे रोहन की पार्टी बड़ी ही अच्छे से हुई जब पार्टी खत्म हो गई तो रोहन मुझे कहने लगा कि आदित्य तुमने मेरा बहुत साथ दिया। मैंने रोहन को कहा रोहन इसमें साथ देने वाली कौन सी बात है तुम्हें तो पता ही है ना कि मैं तुम्हारे साथ हमेशा ही खड़ा हूं। रोहन भी अब अपने नए घर में शिफ्ट हो चुका था और मैं अक्सर उनके घर पर जाया करता रोहन और मेरे बीच बहुत अच्छी दोस्ती है रोहन को कोई जरूरत होती तो रोहन सबसे पहले मुझे ही कहता। रोहन कुछ दिनों के लिए अपने माता पिता के साथ अपने गांव जाना चाहता था इसलिए वह कुछ दिनों के लिए अपने माता-पिता के साथ गांव चला गया दिव्या घर पर अकेली थी। रोहन ने मुझे कहा था कि तुम दिव्या का ध्यान रखना है इसलिए मैं ऑफिस के बाद दिव्या से मिलने के लिए गया वह घर पर ही थी। वह मुझे कहने लगी आदित्य क्या आप मेरे साथ मेरी मदद कर देंगे? मैंने दिव्या को कहा हां दिव्या कहो ना क्या मदद करनी है दिव्या ने मुझे कहा कि बल्ब फ्यूज हो गया था उसे बदलना था। मैंने दिव्या से कहा मैं चेंज कर देता हूं लेकिन दिव्या ने मुझे कहा कि नहीं आप सिर्फ स्टूल को पकड़ कर रखिएगा। मैंने स्टूल को पकडकर रखा हुआ था और दिव्या बल्ब लगा रही थी मैं उसकी गांड की तरह देख रहा था कि तभी उसका पैर फिसला और वह मेरे ऊपर आ कर गिरी। जैसे ही वह मेरे ऊपर आ कर गिरी तो उसके स्तन मुझसे टकराने लगे और उसके होठों मुझसे टकराने के लिए तैयार थे। उसने अपने होठों को मुझसे टकराया तो मैंने भी उसकी गांड को दबाया मैने उसकी साड़ी को जब ऊपर किया तो उसकी पैंटी के अंदर से मैंने अपने हाथ को डालो और उसकी गांड को मैं कस कर दबा रहा था। उसकी चूत के अंदर मैने उंगली घुसा दी मैंने अब दिव्या को अपने नीचे लेटा दिया था दिव्या मेरे नीचे लेटी हुई थी मेरा लंड बाहर की तरफ को आने के लिए तैयार हो चुका था।

    मैंने दिव्या के सुडौल और बडे स्तनों को दबाना शुरू किया तो उसने अपने ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू किया मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके स्तनों का रसपान करना शुरू कर दिया। उसके स्तनों का रसपान कर के मुझे आनंद आ रहा था मै बहुत देर तक उसके स्तनों का ऐसे ही रसपान करता रहा मैंने उसकी साड़ी को उतार कर एक किनारे रख दिया था जब मैंने उसकी पैंटी को नीचे उतारा तो उसकी चूत को मैंने बहुत देर तक चटा। उसकी चूत चाट कर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था दिव्या मुझे कहने लगी आदित्य मैंने कभी सोचा नहीं था लेकिन आज मैं अपने आपको बिल्कुल रोक ना सकी। मैंने उससे कहा मैं भी कहां अपने आपको रोक पाया हूं यह कहते ही मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया उसकी चूत के अंदर मेरा लंड जा चुका था मैं उसे धक्के मार रहा था। मैंने उसे बहुत देर तक धक्के मारे वह बिल्कुल रह नहीं पा रही थी वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लेती।

    वह मुझे कहती तुम्हारा लंड बहुत ही ज्यादा मोटा है। मैंने उससे कहा क्या मेरा लंड रोहन से ज्यादा मोटा है? वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ज्यादा मोटा है और यह बात उसने कहीं तो मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखते हुए उसकी चूतड़ों पर इतनी तेज प्रहार किया उसका पूरा शरीर हिलने लगा था। उसके स्तन इतना ज्यादा हिल रहे थे कि वह मुझे कहने लगी मेरे स्तन बहुत हिल रहे हैं तुम उन्हें अपने मुंह में ले लो। मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उसकी चूत के मजे बहुत देर तक लिए दिव्या की चूत मैने बहुत देर तक मारी। दिव्या को चोदने मे जो आनंद की अनुभूति हुई वह मेरे लिए अलग थी। काफी देर तक ऐसा चलता रहा लेकिन हम दोनों के अंदर से गर्मी निकल रही थी उससे कोई भी झेल ना सका मैंने अपने वीर्य को दिव्या के मुंह के अंदर डाल दिया। जब तक रोहन नही आया था तब तक दिव्य मेरे साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए उतावली रहती थी और उसके बाद भी जब उसे मौका मिलता तो वह कोई मौका नहीं छोड़ती थी।


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