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    आज कुछ नया करें भाभी?

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    Kamukta, hindi sex stories, antarvasna:

    Aaj kuch naya karien bhabhi? मैं बहुत ही खुश नसीब हूं जो मुझे सुनीता के रूप में एक अच्छी पत्नी मिली सुनीता ने हमेशा ही मेरा साथ दिया और मैं हमेशा ही सुनीता से खुश रहता। मैं एक दुकान चलाता हूं मेरी दुकान के आसपास काफी बड़ी दुकानें भी हैं और अब तो मेरी दुकान के बिल्कुल सामने एक मॉल भी बन चुका है। हालांकि उस मॉल के बन जाने के कारण मेरी दुकान पर उतना असर नहीं पड़ा परंतु मेरे आस-पास की दुकानों पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा क्योंकि अब ज्यादातर लोग मॉल में ही जाने लगे थे। मेरा लोगों के साथ व्यवहार अच्छा था इसलिए अभी भी मेरे पास दुकान में सामान लेने के लिए सब लोग आया करते थे। जितने भी हमारे आस पड़ोस के लोग और हमारे मोहल्ले के लोग थे वह सब मुझसे ही सामान लेकर जाते क्योंकि मैं लोगों के साथ बड़ी अच्छी तरीके से पेश आता था मेरा उनके प्रति व्यवहार बड़ा अच्छा था।

    मेरी दुकान पर इतना असर तो नहीं पड़ा परंतु आस पड़ोस की दुकान अब खाली होने लगी थी और कुछ लोगों ने तो अपनी दुकानें बेच दी थी क्योंकि उसमें कुछ मुनाफा ही नहीं हो पा रहा था लेकिन मुझ पर उस मॉल के बनने का ज्यादा असर नहीं पड़ा। सब कुछ बदलता जा रहा था समय के साथ साथ मुझे भी अपनी दुकान को थोड़ा बदलना था इसलिए मैंने सोचा कि अपनी दुकान में काम करवा लेता हूं। दुकान भी काफी पुरानी हो चुकी थी और बारिश का मौसम भी आने वाला था मुझे लगा कि बारिश से पहले मैं दुकान में काम करवा लेता हूं और बारिश होने से पहले मैंने दुकान का काम करवाने के बारे में सोच लिया था। कुछ दिनों के लिए मैंने सोचा कि दुकान को बंद रखता हूं और मैंने आप अपनी दुकान का काम करवाना शुरू कर दिया दुकान की मरम्मत का काम चल रहा था अब दुकान पहले से ज्यादा अच्छी हो चुकी थी। मैंने दुकान के अंदर अब ए सी भी लगवा दिया था क्योंकि समय के साथ मुझे भी बदलना था इसलिए मैंने दुकान को पूरी तरीके से बदल दिया।

    जो भी कस्टमर मेरी दुकान में आता वह मुझे बधाई देता और इस बात की तो वह जरूर तारीफ किया करता कि आपने दुकान में काम करवा कर बहुत अच्छा किया क्योंकि मैं सबके साथ बहुत जल्दी ही घुल मिल जाता हूं इसलिए मुझे इस बात का बहुत फायदा मिलता कि कम से कम मैं अपनी दुकान तो अच्छे से चला पा रहा हूं। मेरे बड़े भैया जो कि एक बड़ी कंपनी में मैनेजर के पद पर हैं और वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते हैं कुछ दिनों पहले वह हमारी दुकान पर आए और कहने लगे कि गिरीश तुम कैसे हो। मैंने उन्हें बताया कि भैया मैं तो ठीक हूं आप बताइए आप कैसे हैं तो वह मुझे कहने लगे कि मैं भी ठीक हूं सोचा कि तुमसे मिल लेता हूं काफी दिन हो गए तुमसे मुलाकात भी नहीं हुई थी। मैंने भैया को कहा भैया आप तो अब घर पर भी नहीं आते भैया कहने लगे कि गिरीश तुम तो जानते ही हो काम का इतना दबाव रहता है कि अपने लिए भी समय निकाल पाना मेरे लिए मुश्किल होता है परंतु फिर भी मैं अपने लिए समय निकाल कर तुमसे मिलने के लिए चला आया। भैया कहने लगे कि गिरीश यह तुमने बहुत अच्छा किया जो तुमने अपनी दुकान का काम करवा लिया और अब तुम दुकान अच्छे से चला पा रहे हो मुझे इस बात की खुशी है कि तुम बहुत ही मेहनत से काम कर रहे हो और तुमने हमेशा ही मेहनत की है। भैया मुझे कहने लगे कि सुनीता को तुम कभी घर पर लेकर आना मैंने भैया को कहा हां भैया मैं सुनीता के साथ जरूर आपसे मिलने के लिए आऊंगा। भैया ज्यादा देर तक मेरे पास नहीं बैठ पाए क्योंकि उन्हें घर जाना था पहले हम सब लोग साथ में ही रहा करते थे लेकिन अब भैया और भाभी अलग रहते हैं। भाभी के कहने पर ही भैया ने अलग रहने का फैसला किया था और अब वह अलग रहने लगे हैं परंतु भैया के साथ मेरे अब भी वैसे ही रिश्ते हैं जैसे कि पहले थे। भैया से मुझे कभी कोई शिकायत नहीं थी परंतु भाभी की वजह से हमारे परिवार में जो दरार पैदा हुई उसके कारण भैया अलग रहने के लिए चले गए पापा और मम्मी के देहांत के बाद हमारा परिवार जैसे पूरी तरीके से बिखर चुका था। मैं शाम को जब घर लौटा तो मैंने सुनीता को कहा आज मुझे भैया मिले थे तो सुनीता इस बात से बहुत खुश हो गयी और कहने लगी कि भैया क्या कह रहे थे। मैंने सुनीता को बताया कि भैया कह रहे थे कि तुम लोग घर पर मिलने के लिए आना सुनीता मुझे कहने लगी कि हम लोगों को वैसे भी उन्हें मिले हुए काफी समय हो चुका है क्या हम लोगों को उनके घर जाना चाहिए। मैंने सुनीता को कहा हम लोग कल शाम को ही भैया से मिलने के लिए चलते हैं।

    हम लोग अगले दिन भैया से मिलने के लिए चले गए भाभी भी खुश थी क्योंकि अब हम लोग साथ में नहीं रहते हैं। भैया और मैं साथ में बात कर रहे थे तो भैया मुझसे पूछने लगे कि गिरीश क्या तुमने अपनी बेटी का दाखिला स्कूल में करवा दिया है तो मैंने भैया को कहा हां भैया मैंने उसका दाखिला तो करवा दिया है। हालांकि वहां पर फीस बहुत ज्यादा थी लेकिन उसके बावजूद भी मैंने उसका दाखिला वहां करवा दिया है मेरी बेटी जो कि अभी कक्षा 10 पास कर चुकी है और इस वर्ष वह 11वीं में है। मैं चाहता था कि वह एक अच्छे स्कूल में पढ़े इसलिए मैंने उसका दाखिला एक अच्छे स्कूल में करवा दिया उसका दाखिला करवाने के लिए मुझे काफी ज्यादा फीस देनी पड़ी लेकिन मैं उसका दाखिला करवा चुका था वह अच्छे से अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे रही थी। हम लोगों ने डिनर किया और रात के वक्त हम लोग घर लौट आये भैया के साथ काफी समय बाद बात कर के अच्छा लगा क्योंकि मैंने तो सोचा भी नहीं था की इतने समय बाद हम लोग भैया से मिलेंगे।

    मैं भैया से मिलने के लिए कम ही जाया करता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि भाभी की वजह से शायद हम लोगों के बीच इतनी दूरी पैदा हो चुकी है इसलिए मैं भैया से मिलने कम ही जाया करता था। जब हम लोग घर लौट रहे थे तो मुझसे सुनीता कहने लगी कि आज भैया और भाभी से मिलकर अच्छा लगा मैंने सुनीता को कहा हां सुनीता मुझे काफी समय बाद आज भैया के चेहरे पर खुशी नजर आई भैया आज बहुत खुश नजर आ रहे थे। हम लोग घर पहुंच चुके थे और जब हम लोग घर पहुंचे तो मुझे बड़ी तेज नींद आ रही थी मैं सुनीता को कहने लगा कि मैं सोने जा रहा हूं। मैं जैसे ही बिस्तर में लेटा तो वैसे ही मुझे नींद आ गई और मैं सो चुका था अगले दिन मैं जल्दी ही दुकान पर चला गया था क्योंकि मुझे कुछ जरूरी काम था इसलिए मुझे जल्दी दुकान पर जाना पड़ा। मैं जब दुकान पर पहुंचा तो सुनीता का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि आपने आज नाश्ता भी नहीं किया मैंने सुनीता को कहा मैं बाहर ही नाश्ता कर लूंगा। मैंने अपनी दुकान के पास ही नाश्ता कर लिया था मैंने जब दुकान खोली तो उस वक्त मेरी दुकान में काम करने वाला लड़का भी दुकान पर नहीं पहुंचा था मैंने उसे फोन कर के कहा कि तुम कब तक आओगे। वह कहने लगा कि मालिक बस थोड़ी देर बाद पहुंच रहा हूं वह थोड़ी देर में ही दुकान में पहुंच गया और जब वह दुकान में पहुंचा तो वह मुझे कहने लगा कि आज आप जल्दी दुकान में आ गए। मैंने उसे कहा हां आज मुझे कुछ जरूरी काम था इसलिए मुझे जल्दी दुकान में आना पड़ा। दोपहर के बाद दुकान में दीपिका भाभी आई वह जब भी दुकान में आती है तो मुझे देखकर हमेशा ही मजाकिया लहजे मे कहती आप आज बड़े अच्छे दिख रहे हैं। मैं उन्हें हमेशा ही छेडता रहता मैं उनके साथ हंसी मजाक किया करता। जब वह दुकान मे आई तो वह मुझे कहने लगी कभी आप घर पर भी आईए? मैंने उन्हें कहा भाभी जी आप हमे घर पर बुलाते ही नहीं है तो उन्होंने कहा आज आप घर पर आ जाइए मैं आपका इंतजार करती हूं। जब उन्होंने यह बात कही तो मैंने भी उनके घर पर जाने का फैसला कर लिया जब मैं उनके घर पर गया तो वह घर पर अकेली थी मैंने जब उनको देखा तो मुझे बड़ा अच्छा लगा, कम से कम मुझे आज मौका तो मिल गया था। मैंने दीपिका भाभी को अपनी बाहों में भर लिया मैंने अपनी बाहों में लिया तो वह पूरी तरीके से मचलने लगी। वह कहन लगी लगता है आज आप कुछ ज्यादा ही मूड में नजर आ रहे हैं मैंने उन्हें कहा मूड में तो आपने मुझे कर दिया है।

    मुझे आपको देखकर आज कुछ अलग ही अंदाजा हो गया था कि आप आज मुझसे चूत मरवाना चाहती हैं मैंने उनकी गांड को जोर से दबाया जब मैंने उनकी चूतडो को दबाना शुरू किया तो वह उत्तेजित होने लगी। मैंने उनकी साड़ी को ऊपर करते हुए उनकी पैंटी को उतारा जब मैंने उनकी पैंटी को उतारा तो मैंने अपने लंड को चूत के अंदर डालने लगा मेरा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया। वह मुझे कहने लगी आप तो बिल्कुल भी सब्र नहीं कर रहा है मैंने कहा भाभी जी आपको देखकर भला कौन सब्र करेगा। मेरा लंड उनकी चूत के अंदर जा चुका था वह अपने दोनों पैरों को खोल कर मुझे कहने लगी और तेज धक्के मारो। मैंने बड़ी तेजी से धक्के मारे मेरा वीर्य बाहर की तरफ आने वाला था क्योंकि उनकी चूत मार कर मुझे मजा आ गया काफी देर तक चूत का मजा लेते रहा जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था मैंने भाभी के मुंह के अंदर अपने वीर्य को गिरा दिया। उन्होंने मुझे कहा आपने तो आज मुझे मज दिला दिए मैंने भाभी से कहा लेकिन आज मैं आपके साथ कुछ नया करना चाहता हूं।

    वह कहने लगी आप क्या करना चाहते हैं मैंने उन्हें बताया मैं आज आपकी गांड मारना चाहता हूं वह बड़ी ही खुश हो गई मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश करते हुए उनकी गांड के अंदर घुसा दिया मेरा लंड जैसे ही उनकी गांड के अंदर घुसा तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी कसम से आज तो मजा आ गया। मैं जिस प्रकार से उनको धक्के मारता उससे तो मझे बड़ा आनंद आ रहा था वह बड़े मूड में नजर आ रही थी। मैंने बहुत देर तक उन्हें धक्के मारे जिस प्रकार से मेरा लंड उनकी गांड के अंदर बाहर होता उससे मुझे बहुत गर्मी महसूस हो रही है उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए। वह मुझे कहने लगी आज तो आपने मेरे अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से जगा कर रख दिया है। मेरा लंड उनकी गांड के अंदर बाहर हो रहा था जिस प्रकार से मेरा लंड उनकी गांड के अंदर बाहर हो रहा था उससे मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था वह भी बड़ी खुश नजर आ रही थी वह आपनी गांड को लगातार मुझसे टकरा रही थी। जब उनकी गांड मुझसे टकराती तो मुझे बड़ा ही मजा आता मैंने बहुत देर तक उनकी गंड के मजे लिए मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था। मैं ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकता था इसलिए मैंने अपने वीर्य को उनकी गांड के अंदर ही गिरा दिया मेरा वीर्य उनकी गांड के अंदर गिर चुका था जिस प्रकार से मुझे मजा आया उससे मैं बड़ा खुश हो गया। दीपिका भाभी से मैने कहा अभी मैं दुकान में जाता हूं आपसे मिलने के लिए दोबारा आंऊगा वह कहने लगी मैं आपका इंतजार करूंगी। मैं दुकान में चला गया।


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