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    भाभी के वह सुडौल वक्ष

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    Antarvasna, hindi sex kahani: जब मेरा तबादला हेदराबाद हो गया तो मैंने अपने दोस्त से कहा कि वह मेरे लिए किसी मकान की खोज करे क्योकि मुझे हेदराबाद के बारे मे ज्यादा पता नही था। मेरा दोस्त मुझे अपने किसी परिचित के पास ले गया जिनके घर के ऊपर का फ्लोर खाली था। मुझे एक अच्छा घर मिल गया था उनका नाम संजय है और वह अपनी पत्नी के साथ रहते है मैं भी अब उनके साथ घर पर रहने के लिए सहमत हो गया और मै अपने सामान को उनके घर पर ले आया। संजय ने बताया कि उनकी पत्नी अपनी मां के घर पर गई है और वह अगले सप्ताह आ रही है मेरे लिए नई जगह पर सब कुछ नया था। एक दिन संजय ने बताया की उनकी पत्नी शाम को आ रही है और उसे रेलवे स्टेशन से लेकर आना है लेकिन दुर्भाग्य से कार्यालय की कुछ बहुत ही जरूरी मीटिंग होने के कारण संजय ने मुझसे प्रार्थना की कि मैं उसे ले आंऊ। मैं उन्हें लेने के लिए 5:00 बजे रेलवे स्टेशन पर चला गया मैंने उन्हें फोन किया क्योंकि संजय ने मुझे उनका नंबर दिया था उन्होंने मुझसे कहा कि ट्रेन 15 मिनट देरी से चल रही है इसलिए आपको इंतजार करना पड़ेगा। शायद संजय ने अपनी पत्नी को यह बता दिया था कि वह उन्हें लेने के लिए नहीं आ पाएंगे। मैं उनका स्टेशन पर ही इंतजार कर रहा था आस पास से गुजरते हुए लोगों को मैं देख रहा था मैंने अपनी घड़ी पर देखा तो 15 मिनट हो चुके थे लेकिन अभी भी ट्रेन नहीं आई थी।

    मैं इंतजार करने लगा तभी आगे से एक ट्रेन आती हुई नजर आई मैं स्टेशन पर ही खड़ा था जैसे ही ट्रेन आई तो मैंने उन्हें तुरंत फोन कर दिया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे कॉल किया और मैंने उन्हें कहा आप कहां पर हैं तो वह मुझे कहने लगी कि मैं रेलवे स्टेशन पर पहुंच चुकी हूं क्योंकि स्टेशन पर काफी भीड़ थी इसलिए उन्हें ढूंढना मुश्किल हो रहा था। थोड़ी देर बाद मेरी उनसे मुलाकात हो गई उनके साथ उनका छोटा बच्चा भी था उन्होंने मुझे कहा कि क्या आप संजय के दोस्त हैं तो मैंने उन्हें कहा हां आप यही समझ लीजिए। वह मुझे कहने लगे कि मैं समझी नहीं, मैंने उन्हें कहा दरअसल मैं कुछ दिन पहले ही आपके घर पर रहने के लिए आया हूं संजय आ नहीं पाए थे इसलिए उन्होंने मुझे कहा कि तुम ही लता को ले आना। मैंने उन्हें अपना परिचय दिया मैंने उन्हें कहा मेरा नाम अनमोल कुमार है वह कहने लगी कि चलिए हम लोग को घर चलते हैं मैंने उन्हें कहा ठीक है।

    मैंने उनके हाथ से बैग को ले लिया और अपने कंधे पर रखा अब हम लोग स्टेशन से बाहर आ चुके थे। मैंने ऑटो वाले से चलने के लिए कहा तो वह काफी ज्यादा किराया बता रहा था परंतु थोड़ी देर बाद हम लोग वहां से चले गए। अब हम लोग घर पहुंच चुके थे उन्होंने मुझे कहा कि आपका बहुत धन्यवाद जो आज आप मुझे लेने के लिए आ गए मैंने उन्हें कहा इसमें धन्यवाद की कोई बात ही नहीं है। लता भाभी कहने लगी की आप बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं मैंने उन्हें कहा हां सभी लोग यही कहते है मैंने उन्हें कहा आप थोड़ी देर आराम कर लीजिए मैं भी आराम कर लेता हूं। मैं अपने रूम में बैठा हुआ था करीब 8:00 बजे संजय मेरे पास आये और कहने लगे कि अनमोल आपने मेरी बहुत मदद की मैंने उन्हें कहा संजय इसमें मदद की क्या बात है यदि आप मेरी जगह होते तो क्या आप ऐसा नहीं करते। वह कहने लगे कि नहीं मैं भी तुम्हारी मदद जरूर करता संजय ने मुझे कहा कि लता कह रही है कि आज आप हमारे साथ ही डिनर कीजिए। मैंने पहले तो संजय को मना किया लेकिन संजय ने कहा कि नहीं आज आपको हमारे साथ डिनर करना ही होगा मैं भी उनकी बात को टाल ना सका और उनके साथ मैं डिनर करने को तैयार हो गया। मैंने संजय से कहा मैं थोड़ी देर बाद आता हूं संजय भी जा चुके थे मैंने सोचा कि पहले मैं नहा लेता हूं। मैं बाथरूम में नहाने के लिए चला गया मैं नहा रहा था और थोड़ी ही देर बाद संजय का फोन मुझे आया और कहने लगे कि अनमोल आप आ जाइए मैंने उन्हें कहा ठीक है संजय बस 5 मिनट में आ रहा हूं। 5 मिनट बाद मैं चला गया जब मैं उनके घर पर गया तो खाने की बड़ी अच्छी खुशबू आ रही थी मैंने संजय से कहा लता भाभी के आने से घर में खाने की बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है। इस बात पर संजय ठहाके लगाकर हंसने लगे और लता भाभी भी कहने लगी कि अब यह तो आपको खा कर ही पता चलेगा कि कितना अच्छा खाना बना है। हम सब साथ में बैठे हुए थे तो लता भाभी ने भी मुझसे मेरे बारे में पूछा उन्होंने मुझे पूछा कि क्या आपकी शादी हो चुकी है तो मैंने उन्हें कहा हां मेरी शादी को हुए एक वर्ष हो चुका है।

    उन्होंने कहा अच्छा तो आपने एक वर्ष पहले शादी कर ली मैंने उन्हें कहा हां एक वर्ष पहले मेरी शादी हो चुकी है। हम तीनो लोग आपस में बात कर रहे थे तो मुझे भी उन लोगों के बारे में काफी कुछ जानने का मौका मिला। लता भाभी ने मुझे बताया कि संजय की उनसे पहली मुलाकात कैसे हुई थी और उसके बाद उनके परिवार वाले इस रिश्ते को मंजूर करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे लेकिन आखिरकार संजय के कहने पर उनके माता-पिता उनकी शादी के लिए मान गए। संजय के माता-पिता आज भी गांव में रहते हैं संजय का गांव हैदराबाद से कुछ दूरी पर है लता भाभी दिल की बड़ी ही अच्छी हैं और उस दिन उनके हाथ का खाना खाकर भी बड़ा अच्छा लगा। मैंने उन्हें कहा कि भाभी आप खाना बड़ा ही अच्छा बनाती है तो वह मुझे कहने लगी कि यह सब तो मेरी मां ने मुझे सिखाया है। मैंने उन्हें कहा भाभी जी अब मैं चलता हूं संजय कहने लगे कि ठीक है अनमोल और मैं अपने रूम में चला आया। मैं जब अपने रूम में आया तो मेरी पत्नी का मुझे फोन आ रहा था लेकिन मैं उसका फोन उठा नहीं पाया था इसलिए मैंने उसे दोबारा फोन किया तो वह कहने लगी कि अनमोल आप कैसे हैं।

    मैंने अपनी पत्नी से काफी देर तक बात की तो वह कहने लगी कि मैं तो अच्छी हूं और उसने मम्मी पापा के बारे में भी बताया। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि तुम मम्मी पापा का ध्यान अच्छे से रख तो रही हो वह कहने लगी कि हां मैं मम्मी पापा का ध्यान बड़े अच्छे से रख रही हूँ आप इस बारे में बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। मम्मी पापा का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है जिस वजह से मुझे चिंता रहती है मैंने अपनी पत्नी से कहा अभी तो मैं फोन रखता हूं तुम्हें बाद में फोन करूंगा। वह कहने लगी कि ठीक है आप अपना ध्यान दीजिए मैंने अब फोन रख दिया था। मुझे बड़ी गहरी नींद आ रही थी तो मैं सो चुका था। मै अपनी छुट्टी के दिन घर पर ही था उस दिन संजय घर पर नहीं थे, मैं लता भाभी के साथ बैठा हुआ था उनका बच्चा रो रहा था। मैंने उन्हें कहा लाइए मुझे आप बच्चे को पकड़ा दीजिए उन्होंने जब बच्चे को मुझे पकड़ाया तो उनके स्तनों पर मेरा हाथ लग गया। उनके गोरे बदन और उनके स्तनों पर जब मेरी नजर पड़ी तो मैं उन्हें देखते ही रहा बच्चा मेरी गोद में था लेकिन अभी भी वह चुप नहीं हो रहा था। उन्होंने मुझे कहा लाइए मै बच्चे को दूध पिला देती हूं उन्होंने बच्चों को दूध पिलाया मै उनकी तरफ देख रहा था उनके स्तन मुझे साफ दिखाई दे रहे थे मेरा लंड खड़ा होने लगा मैं उन्हें चोदने की पूरी तैयारी में था थोड़ी देर बाद बच्चा सो चुका था। भाभी मेरे साथ बैठी हुई थी वह बड़ी शर्मीली है मैने उन्हे कहा भाभी आपके स्तन बड़े ही जानदार और सुडोल है। वह कहने लगी आप यह किस प्रकार की बात कर रहे हैं लेकिन जब मैंने उनके होंठों को चूम लिया तो वह मेरी तरफ आकर्षित हो चुकी थी मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए बेताब थी। मैं उनकी चूत मारने के लिए तैयार था जब मैने उनके होठों का रसपान किया वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी मेरा लंड खड़ा हो चुका था मेरा लंड उनकी चूत में जाने के लिए तैयार था मैंने उन्हें कहा आप मेरे लंड को अपने मुंह में ले लीजिए उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया। उन्होंने जब मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने उन्हें कहा आप थोड़ा सा और अंदर लीजिए?

    भाभी ने मेरे लंड को पूरे अंदर तक समा लिया जिस प्रकार से वह मेरे लंड को चूस रही थी उससे मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी हम दोनों ही अपने आपको रोक ना सके। मैंने उन्हें कहा मैं आपकी चूत में अपने लंड को डालना चाहता हूं मैंने भी उनकी चूत को चाटना शुरू किया। जब उनकी चिकनी चूत पर मेरी नजर जाती तो मेरा लंड हिलोरे मारने लगता मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ निकालता। वह भी बड़ी खुश थी मैंने उनके दोनों पैरों को खोला और उनके दोनों पैरों के बीच मे अपने लंड को घुसाते हुए अंदर की तरफ डाल दिया। मैंने भाभी से कहा भाभी आपकी चूत तो बड़ी ही टाइट है? वह कहने लगी आप भी मेरे स्तनों से दूध निकाल दीजिए? मैंने भी उनके स्तनों को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान शुरू किया तो उनके स्तनों से दूध बाहर निकलने लगा मेरे अंदर की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी जिस प्रकार से मैं अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था उससे तो उन्हें बड़ा ही मजा आ रहा था वह बहुत ही ज्यादा खुश थी।

    वह मुझे कहने लगी आप मेरी गांड भी मार लीजिए मैंने मैंने कहा भाभी जी आप यदि मुझसे अपनी गांड मरवाएंगी तो मुझे और भी ज्यादा मजा आ जाएगा मैं उनकी गांड मारने के लिए तैयार था। मैंने उनकी गांड के अंदर अपने लंड को तेल लगाते हुए डाला तो मेरा लंड छिल चुका था लेकिन मैं उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मुझे धक्के मारने मे बड़ा मजा आ रहा था मैंने जैसे ही उनकी गांड के अंदर अपने वीर्य को गिराया तो वह कहने लगी आपने तो आज मेरी गांड के अंदर से खून निकाल कर रख दिया है। मैंने उन्हें कहा लेकिन भाभी जी आज आपके साथ बड़ा ही मजा आ गया। मैं उनके साथ बैठ गया वह मेरी तरफ देख रही थी और मेरी बाहों में वह दोबारा गई 10 मिनट बाद मेरा लंड उनको चोदने के लिए तैयार था। मैंने उनकी चूत के मजे दोबारा लिए उसके बाद तो भाभी जी मेरी तरफ पूरी तरीके से आकर्षित थी वह मेरी दीवानी हो चुकी थी उनको मेरे लंड को लेने की आदत हो चुकी थी।

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