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    खुजली मिटाता मेरा सहकर्मी

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    खुजली मिटाता मेरा सहकर्मी

    Kamukta, hindi sex story, antarvasna:

    Khujli mitata mera sahkarmi मैं रूम के कोने में लगी हुई कुर्सी पर बैठी हुई थी और फोन की घंटी बड़ी तेजी से बज रही थी मैंने फोन नही उठाया मैं सोचने लगी कि कहीं राहुल का फोन तो नहीं होगा। दो से तीन बार फोन की घंटी बजी लेकिन मैंने तब भी फोन नहीं उठाया और मैं बैठी रही कुछ देर बाद मैंने फोन उठा ही लिया मैंने जब फोन उठाया तो राहुल मुझे कहने लगा कि दिव्या तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही हो। मैंने राहुल को कहा राहुल मैं काम कर रही थी इसलिए तुम्हारा फोन नहीं उठा पाई। मैं नहीं चाहती थी कि मैं अपने ससुराल जाऊं क्योंकि मेरे ससुराल में मुझे वह प्यार और सम्मान कभी मिला ही नहीं और राहुल हमेशा अपनी मां की तरफदारी ही किया करता था और अपनी मां के पल्लू से बंधा हुआ था। मैं तो कभी समझ ही नहीं पाई कि राहुल कभी मुझसे प्यार भी करता है या नहीं राहुल को हमेशा मुझसे यह शिकायत रहती थी कि जब भी हम लोगों के बीच कुछ ऐसा होता है तो मैं अपने मायके चली जाती हूं लेकिन मेरे पास भी तो और कोई दूसरा रास्ता नहीं होता।

    राहुल मुझे फोन पर कहने लगे कि दिव्या तुम घर कब आ रही हो मैंने राहुल को कहा राहुल अभी कुछ दिनों पहले ही तो मैं मायके आई हूं कुछ दिन तो मुझे मायके में रहने दो। राहुल चाहते थे कि मैं जल्द से अपने ससुराल लौट आऊं परंतु मैं यह नहीं चाहती थी मेरे चेहरे से साफ प्रतीत हो रहा था कि मैं काफी चिंतित हूं। जब राहुल ने फोन रखा तो मेरी मां कमरे में आई और मुझे कहने लगी की दिव्या तुम्हारे माथे पर इतना पसीना क्यों है तुम क्या किसी चिंता में हो। मैंने अपनी मां को अपने और राहुल के बीच हुए झगड़े के बारे में नहीं बताया था और ना ही मैंने अपनी मां को अपने ससुराल के बारे में कभी कुछ बताया मैं नहीं चाहती थी कि मैं इस बारे में मां को कुछ बताऊं। राहुल ने जब मां से बात की तो मां को इस बारे में पता चल चुका था और उन्होंने मुझे समझाते हुए कहा देखो बेटा कुछ समय बाद तुम्हारे ऊपर घर की जिम्मेदारी आ जाएगी उसके बाद तुम्हें ही घर की सारी जिम्मेदारियों को निभाना है।

    मैंने मां को कहा मां वह सब तो ठीक है लेकिन मेरी सासू मां मुझसे बिल्कुल भी अच्छे तरीके से पेश नही आती और मैं इस बात से बहुत ज्यादा परेशान रहती हूं अब आप ही मुझे बताइए ना मुझे ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम उन्हें कभी कोई शिकायत का मौका ही मत दिया करो। मैंने मां को कहा मां वह हमेशा ही मुझे ताने मारती हैं और कहती हैं कि तुम्हारे मां-बाप ने हमे कुछ दिया ही नहीं वह दहेज की बहुत लालची हैं और उन्हें हमेशा ही यह लगता है कि मेरे मां बाप ने कभी भी उन्हें कुछ नहीं दिया। मां कहने लगी कि बेटा हम लोगों से जितना हो सकता था उतना हम लोगों ने किया तुम ही मुझे बताओ कि तुम्हारे बाबूजी इतने वर्ष की अपनी नौकरी में क्या कुछ कर पाए होंगे घर में भी तो इतने खर्चे हैं और तुम्हारी शादी का कर्जा उनके सर पर अभी तक बकाया है। मैंने मां को कहा मां मैं इस बात को भलीभांति जानती हूं लेकिन वह लोग इस बात को नहीं समझते और राहुल भी अपनी मां की हमेशा तरफदारी ही किया करता है वह हमेशा उनकी तरफ से मुझे बोलता है इसलिए मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और इस बार भी ऐसा ही हुआ तो मैंने भी राहुल को कह दिया कि यदि तुम्हारा व्यवहार ऐसा ही रहा तो मैं तुम्हें छोड़ कर चली जाऊंगी। मां ने मुझे समझाया और मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने ससुराल लौट जाना चाहिए और मैं अपने ससुराल लौट गई जब मैं अपने ससुराल लौटी तो कुछ समय तक तो राहुल और मेरी सासू मां का व्यवहार मेरे प्रति अच्छा रहा लेकिन थोड़े समय बाद फिर दोबारा से वह लोग मुझे परेशान करने लगे। मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी थी और मैंने मां को जब इस बारे में बताया तो मां कहने लगी कि बेटा तुम चिंतित मत हो सब कुछ ठीक हो जाएगा मैंने मां को कहा मां अब मैं ज्यादा समय तक यह सब बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी। मां के पास भी कोई जवाब नहीं था क्योंकि उन्होंने ही मेरी शादी राहुल से करवाई थी मैं तो कभी राहुल से शादी करना ही नहीं चाहती थी लेकिन उनकी जिद के आगे मेरे पास कोई जवाब नहीं था इसलिए मुझे राहुल से शादी करनी पड़ी। अब मेरी शादी राहुल से तो हो चुकी थी लेकिन मैं बहुत परेशान रहती थी और मुझे हमेशा ही यह डर सताता रहता कि कहीं मैं राहुल से अलग ना हो जाऊं इसलिए मैं अपने भविष्य को सुधारना चाहती थी और उसके लिए मैंने अब जॉब करने का फैसला कर लिया था।

    राहुल ने कभी भी मेरा सपोर्ट नहीं किया और उन्होंने मुझे कहा कि दिव्या क्या तुम जॉब करने वाली हो तो मैंने राहुल को कहा हां मैं जॉब करने वाली हूं। हालांकि वह इस बात से खुश नहीं थे परंतु उसके बावजूद भी मैंने जॉब की और अब मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब पर लग चुकी थी मुझे इस बात की खुशी भी थी कि मैं अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हूं। हालांकि राहुल और मेरी सासू मां इस बात से बिल्कुल खुश नहीं थे उसके बाद भी उन्होंने मुझे कई बार परेशान करने की कोशिश की लेकिन अब मुझे इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता और मैं इन बातों को कभी भी अपने दिल पर नहीं लिया करती। सब कुछ बड़े अच्छे से चल रहा था और ऑफिस में मेरी दोस्ती भी होने लगी थी अपनी मेहनत के बलबूते मैं प्रमोशन भी हासिल कर चुकी थी। राहुल को मेरे प्यार का एहसास उस वक्त हुआ जब राहुल की जॉब जा चुकी थी और मैंने ही राहुल का उस वक्त सपोर्ट किया था। राहुल को लगा कि उसने मेरे साथ बहुत गलत किया है इसलिए राहुल भी अपनी गलती के लिए शर्मिंदा था और वह मुझसे हर रोज इसी बात को कहता कि मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया लेकिन मुझे भी इस बात से आप कोई फर्क नहीं पड़ता था।

    राहुल और मेरे बीच सब कुछ अब ठीक हो चुका था और मैं अपनी जॉब पर भी पूरी तरीके से ध्यान दे पा रही थी मेरी जॉब भी अच्छे से चल रही थी और मेरी निजी जिंदगी भी अच्छी हो चली थी। मैं जिस कंपनी में जॉब करती है उसी कंपनी में मैं जब अविनाश से मिली तो अविनाश से मिलकर मुझे अच्छा लगा अविनाश से मैं कुछ ज्यादा ही खुल कर बातें करने लगी थी और अविनाश मेरे बहुत करीब आ गया था। अविनाश भी मुझसे हमेशा कहता दिव्या आप कितने ज्यादा सुंदर हैं। अविनाश को मैंने अपने पति और अपने रिश्ते के बारे में बताया तो अविनाश भी इस बात से खुश नहीं थे उन्होंने मुझे कहा आपके पति और आपके बीच बिल्कुल बनती नहीं है आपको इस बारे में अपने पति से बात करनी चाहिए। मैंने अविनाश को कहा मैंने ना जाने कितनी बार राहुल से बात की है लेकिन हम दोनों के रिश्ते अभी तक ठीक नहीं हो पाए हैं जब अविनाश ने मेरे हाथों को एक दिन पकड़ कर मेरे गाल पर पप्पी दे दी तो मैं भी समझ गई कि अविनाश मुझसे क्या चाहते हैं। मेरे और राहुल के बीच सेक्स लाइफ भी अच्छी नहीं चल रही थी मैं चाहती थी किसी और के साथ में अपने सेक्स की इच्छा को पूरा करूं और उसी के चलते मैंने अविनाश के साथ सेक्स करने के बारे में सोचा। हम दोनों एक दिन अपने ऑफिस से छुट्टी लेकर घुमने के लिए निकल पड़े जब हम लोग होटल में गए वहां पर अविनाश ने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया जब वह मेरे होठों को चूमता मेरे बदन से गर्मी बाहर की तरफ निकलती मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी और ना ही अविनाश अपने आपको रोक पा रहा था। अविनाश ने जैसे ही मेरी चूत के अंदर अपनी उंगली को डाला तो मैं बहुत ज्यादा मचलने लगी मै बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी जिस प्रकार से अविनाश और मैं एक दूसरे के बदन की गर्मी को बढ रहा थे उससे हम दोनों को अच्छा लग रहा था।

    जब अविनाश ने मेरे कपड़े उतारते हुए मेरे स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था काफी देर तक अविनाश ने मेरे स्तनों का रसपान किया और अविनाश ने मेरे स्तनो से खून भी निकाल दिया था अविनाश ने अपनी जीभ को मेरी चूत पर लगाकर मेरी चूत को चाटना शुरू किया तो मैं बहुत ज्यादा मचलने लगी थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अविनाश का लंड तन कर खड़ा हो चुका था मैने उसे मैं अपने मुंह के अंदर ले लिया अविनाश ने धक्का देते हुए मेरे गले के अंदर तक अपने लंड को डाला अविनाश का लंड पूरी तरीके से चिकना हो चुका था। मेरी चूत से निकलते हुए पानी को मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी मैं अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पाई अविनाश ने भी अपने लंड को चूत पर लगाते हुए अंदर की तरफ डालना शुरू किया जब अविनाश का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर धीरे धीरे प्रवेश होने लगा तो मैं पूरी तरीके से मचलने लगी।

    जब अविनाश का लंड मेरी चूत के अंदर तक चला गया मेरे मुंह से एक आवाज निकली और अविनाश ने मेरे बदन को कस कर पकड़ लिया जिस प्रकार से अविनाश ने मेरी चूत के मजे लिए उससे मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी। अविनाश मुझे लगातार तेजी से धक्के मार रहे थे वह मेरे स्तनों का रसपान करते हुए अपने धक्को में और भी तेजी ला रहा था जिस प्रकार से अविनाश का लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होता उसे मेरे बदन की गर्मी पूरी तरीके से बाहर आ जाती मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। मैंने अविनाश को कहा लगता है मैं झड़ने वाली हूं जैसे ही मैने अविनाश को अपने दोनों पैरों के बीच जकडा तो अविनाश को मेरी चूत टाइट महसूस होने लगी और अविनाश ने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई। अविनाश भी पूरी तरीके से खुश हो चुका था अविनाश ने मुझे गले लगा  कर मेरी होठों को चूम लिया बहुत देर तक अविनाश ने मुझे किस किया मैंने अविनाश को कहा मुझे आज बहुत अच्छा लगा। अविनाश भी खुश हो गया उसके बाद अविनाश और मै एक दूसरे के बहुत ज्यादा करीब आ चुके थे जब भी मुझे अविनाश की जरूरत पड़ती तो अविनाश हमेशा मेरा साथ दिया करता।


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