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    सेक्सी पडोशन – 2

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    सुबह उठा तो देखा की दिव्या आंटी बिस्तर पर नहीं थी और मैं नेकेड लेटा हुआ था.. मैं घर पर उन्हें खोजने लगा.. वो बालकनी में ट्रेड मिल पर रनिंग कर रही थी. आंटी ने ब्लैक कलर की स्पोर्ट वियर पहनी हुई थी, ब्लैक जैकेट और लेग्गिंग्स. आंटी की चौड़ी गांड टाइट लेग्गिंग्स में बहुत ही बड़ी और भारी लग रही थी. रनिंग की वजह से उसके बड़े बड़े बूब्बे बहुत उछल रहे थे और जैकेट से बाहर पॉप हो रहे थे. इतना भरा हुआ बदन स्पोर्ट्सवेयर में और भी सेक्सी लग रहा था. मैं वही खड़ा होकर आंटी के हिलते हुए भारी चुत्तड़ो और चूचियों को देख रहा था.. आंटी ने मुझे देख लिया
    दिव्या: गुडमॉर्निंग आकाश
    मैं: गुड़मॉर्निंग आंटी.. आप डेली एक्सरसाइज करती हो क्या
    दिव्या: हाँ आकाश… मैं थोड़ा मोटी हो रही हूँ इसलिए थोड़ा एक्सरसाइज कर लेती हूँ
    मैं: कौन कहता है की आप मोटी हो.. इतना अच्छा फिगर मेन्टेन है आपका
    दिव्या: थैंक्स फॉर द कॉम्पलिमेंट….
    मैं: और वैसे भी कल रात को पलंग तोड़ मेहनत की है आपने.. और क्या जरुरत है एक्सरसाइज की
    दिव्या: आकाश तुम बहुत नॉटी हो.. मेरी उम्र में मेन्टेन रहने के लिए एक्सरसाइज करना पड़ता है

    फिर आंटी ने ट्रीड मिल बंद की और पसीना पोछने लगी… मैंने आंटी को पकड़ा और उसकी चुत्तड़ो को मसलने लगा…
    मैं: उफ्फ्फ्फ़ आंटी तभी आपकी गांड इतनी मस्त है.. और आपके चुच्चे तो देखकर ही मुंह में पानी आ जाता है
    मैं जैकेट के ऊपर से ही आंटी की चूचियां मसलने लगे… ‘अह्ह्ह्हह आकाश… ‘ मैं आंटी के भारी चूचियों को जोर जोर से मसल रहा था….
    ‘अह्ह्ह्ह उउउउउउ आकाश रात भर तो चोदा है तूने.. फिर से शुरू हो गया’
    ‘आंटी आपकी जितनी बार लेता हूँ मुझे और मजा आता है’
    ‘ओह्ह्ह्हह आकाश तुमने मेरी अंदर फिर से जवानी भर दी है.. अब तो ऐसा लगता है बस तू चोदते रहे मुझे’
    मैं आंटी की जैकेट की चैन खोल धीरे धीरे खोल रहा था और आंटी की बड़े बड़े दूध नंगे हो रहे थे. चेन पूरा खुलते ही आंटी के दूध हवा में उछलने लगे. आंटी की एक एक चूचियां 5-5 किलो जैसी थी. गोरी गोरी फुटबॉल जैसी बड़ी चूचियां जिसे देखकर ही मेरा लंड तन गया. मैं आंटी के दूध को पकड़ कर दबाने लगा… आंटी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी.
    ‘अह्ह्ह्हह ऊऊउ आकाश.. और जोर से दबा’
    ‘उफ्फ्फ आंटी आपकी चूचियां बहुत ही बड़ी और भरी हुई है मेरे तो हाथो में ही नहीं आ रही है.. क्या नाप है आपके दूध का’
    ‘उईईईईई उउउउउउ आकाश 40 की ब्रा पहनती हूँ मैं’
    ‘उफ्फफ्फ्फ़ आंटी क्या मजेदार दूध है आपके.. ऐसे ही चूसते और दबाते रहने का मन कर रहा है’
    ‘अह्ह्ह्ह आकाश ऐसे ही दबाते रह और जोर जोर से चूस…. ओह्ह्ह्हह्ह उईईईईई’
    ‘ओह्ह्ह्हह आंटी सुबह सुबह ऐसा दूध पिने मिल जाये तो मेरी सेहत ही बन जाएगी’
    ‘उईईईईई आकाश चूस ले बेटा पूरा दूध तुम्हारा ही है’
    आंटी की चूचियों से खूब खेलने के बाद मेरा निशाना आंटी की भारी चुत्तड़ थी. मैं आंटी को किश करते हुए उसकी भारी गांड को मसल रहा था.. अह्ह्ह्हह आकाश.. फिर मैंने आंटी की लेग्गिंग्स उतर दी.. अब आंटी पूरा नंगी खड़ी थी… ‘ ओह्ह्ह्ह आकाश तूने तो बालकनी में ही मुझे पूरा नंगा कर दिया.. चल बैडरूम में’
    ‘नहीं आंटी अभी तो मैं आपको यही पेलुँगा.. कोई नहीं है यहाँ पर.. और खुले में आप जैसी माल को चोदने का अलग ही मजा आएगा’
    आंटी मान गयी.. फिर मैं उनकी बूर को चूसने लगा.. ‘उईईईईई अह्ह्ह्ह आकाश… ओह्ह्ह्हह्ह.. बस कर जल्दी से पेल ना… ‘
    आंटी अब पूरा एक्ससिटेड हो चुकी थी.. मैंने आंटी को दिवार से सटाया और उनकी एक टांग उठाई और अपना लंड उनकी बूर में पेल दिया…
    ‘उईईईईई ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आकाश थोड़ा धीरे घुसाया कर’
    ‘आंटी आपका गदराया बदन देखकर कण्ट्रोल नहीं होता’
    फिर मैंने एक जोर का शॉट मारा.. आंटी की चीख निकल आयी..
    ‘तू तो आज मार ही डालेगा.. इतना मोटा लंड इतनी बेरहमी से कोई पेलता है क्या’
    ‘ओह्ह्ह्ह दिव्या मेरी जान ऐसी ही पेले में ज्यादा मजा है ‘
    ऐसा बोलते ही मैं जोर जोर से आंटी को पेलने लगा… मेरा लंड घचा घच आंटी के बूर में अंदर बाहर हो रहा था.. और आंटी जोर जोर से चिल्ला रही थी… आअह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह आकाश साले हरामी इतनी जोर क्यों मार रहा है मेरी’
    मैंने स्पीड कम नहीं की और पूरी ताकत से दिव्या आंटी को चोद रहा था…. ‘अह्ह्ह्हह आकाश और चोद…. फक मी बेबी… मैं आंटी की चूचियों को दबा रहा था और बुरी तरह से चोद रहा था..
    ‘ओह्ह्ह्हह उईईईईई आकाश और चोद बेटा… अच्छे से पेल मुझे’
    आधे घंटे की चुदाई में आंटी झड़ गयी….
    दिव्या: वाह आकाश क्या जोश में चोदा तूने.. मेरी चुत से पूरा पानी निकल गया
    मैं: अह्ह्ह्हह आंटी पर मेरा हुआ नहीं है अभी
    दिव्या: ठीक है और मार ले कुछ शॉट्स
    मैं: नहीं आंटी अब मैं आपकी गांड मारूंगा
    दिव्या: क्या बोल रहा है आकाश… मैंने कभी गांड नहीं मरवाई है
    मैं: आंटी एक बार मजा लेने दो आपकी चुत्तड़ का… इतनी बड़ी गांड अगर नहीं मारी तो लानत है मेरे लंड पर
    दिव्या: पर आकाश बहुत दर्द होगा.. और तेरा लंड भी बहुत मोटा और तगड़ा है
    मैं: ओह्ह्ह्ह आंटी आपकी गांड भी तो बहुत बड़ी है है.. मेरा लंड आराम से ले लेगी.. और मैं अच्छे से करूँगा प्रॉमिस
    दिव्या: ठीक है आकाश.. पर प्यार से मारना मेरी गांड
    मैं: हाँ मेरी जान… मेरे मुंह में तो पानी आ रहा है.. इतनी बड़ी गांड मारने के नाम से

    मैंने आंटी को बालकनी की रेलिंग में सपोर्ट लेने बोला और मैं उसके पीछे आ गया. क्या मस्त चौड़ी गांड थी.. मैं आंटी के गांड में थप्पड़ मारने लगा….
    ‘अह्ह्ह्हह हरामी थप्पड़ क्यों मार है’
    ‘ओह्ह्ह मेरी रांड तेरी गांड पहले लाल करुंगा फिर चोदूँगा’
    मैंने 20-३० थप्पड़ मार कर आंटी की गोरी गांड लाल कर दी… फिर मैंने आंटी की चौड़ी गांड को पकड़ा और अपना लौड़ा आंटी की गांड के होल पर रखा.. मेरा लंड आंटी के चुत के पानी से पहले ही गिला था.. मैंने आंटी की गांड को पकड़ कर एक शॉट मारा.. लंड आंटी के गांड में 2″ घुस गया…
    ‘उईईईईई माँ आकाश… बहुत दर्द हो रहा है.. निकाल ले.. ‘
    ‘आंटी थोड़ा दर्द होगा… ‘
    मैं आंटी की झूलती चूचियों को दबा दबा कर उन्हें आराम पंहुचा रहा था. फिर मैंने लंड को खींचा और फिर से शॉट मारा, इस बार लंड आधा आंटी के गांड में घुस गया था…
    ‘ओह्ह्ह्हह आकाश बेटा मुझे छोड़ दे.. मत मार मेरी गांड.. बहुत दर्द हो रहा है’
    ‘उफ्फ्फ्फ़ मेरी रंडी आंटी तेरी गांड बिना मारे तो मैं छोड़ नहीं सकता.. इतनी बड़ी गांड है मजा तो पूरा लूँगा मैं’
    इस बार मैंने जोर का शॉट मारा और अपना 9″ का लौड़ा पूरा आंटी के गांड में उतार दिया.. आंटी बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगी.. मुझे गली देने लगी और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगी.. पर मैंने आंटी को छोड़ा नहीं… जब आंटी का थोड़ा दर्द कम हुआ तो मैं अपना लंड धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा…
    ‘उईईईईई माँ मार डाला रे आकाश तूने’
    ‘उफ्फ्फ्फ़ आपकी मोटी गांड आखिर फाड़ ही दी मैंने’
    अब मैं तेजी से आंटी की गांड मार रहा था.. मेरा लंड स्पीड से आंटी के गांड में अंदर बाहर हो रहा था… मैं आंटी की गोर बदन को पीछे से किश कर रहा था और उसे चोद रहा था… जब आंटी की भारी गांड मेरे कमर से टकरा रही थी तो मेरा जोश और बढ़ रहा था..
    मैं ताबड़ तोड़ आंटी की गांड मार रहा था.. पीछे से इतनी बड़ी गांड वाली औरत की लेने में बहुत मजा आ रहा था.. आंटी का बदन मेरे आगोश में था, मैं उनके तरबूजों को मसल मसल कर उनकी गांड मार रहा था..
    ‘उफ्फ्फ्फ़ आंटी क्या मखमली चुत्तड़ है तेरी मजा आ गया आपकी मार कर’
    ‘अह्ह्ह्हह आकाश अब मुझे भी अच्छा लग रहा है.. अच्छे से मार मेरी गांड, फाड़ दे ‘
    मैंने बहुत देर तक दिव्या आंटी की गांड मारी और अपना माल अंदर ही गिरा दिया… दिव्या आंटी से अब ठीक से चला नहीं जा रहा था..
    ‘आकाश तूने तो मेरी जान ही निकाल दी आज.. पर मजा बहुत आया’
    ‘दिव्या आंटी इतनी मस्त गांड मार कर मेरा तो दिन बन गया’
    आंटी लड़खड़ते हुए अंदर चली गयी.. और मैं पीछे से आंटी के भारी गांड को देख रहा था

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