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    थोडा अंदर और डालो

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    थोडा अंदर और डालो

    Kamukta, hindi sex kahani, antarvasna:

    Thoda andar aur daalo निखिल और मैं अपने कॉलेज के प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहे थे निखिल मुझे कहने लगा यार पता नहीं यह प्रोजेक्ट कैसे बन पाएगा। मैंने उसे कहा तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा हम लोग अपनी मेहनत से इस प्रोजेक्ट को अच्छा बना पाएंगे, आखिरकार हम लोगों ने अपना प्रोजेक्ट बना ही लिया। यह हमारे कॉलेज का आखरी वर्ष था और अब हम नौकरी की तलाश में थे निखिल की नौकरी तो लग चुकी थी और मैं अभी भी घर पर ही था परन्तु कुछ समय के बाद मेरी भी एक कंपनी में नौकरी लग गई। जब मुझे निखिल मिला तो वह मुझे कहने लगा कि चलो मुझे इस बात की खुशी है कि तुम्हारी भी नौकरी लग गई। हम दोनों एक दूसरे से छुट्टी के दिन ही मिल पाते थे और जब भी हम लोग मिलते तो मुझे बहुत खुशी होती है निखिल मेरे साथ कक्षा 5 से पढ़ते आया है।

    हम लोग बहुत अच्छे दोस्त हैं और हम लोगों की दोस्ती बहुत गहरी है अब हम दोनों अपनी नौकरी में ही ज्यादा बिजी रहने लगे थे इसलिए हमारे पास अब समय कम होता था। निखिल मुझे एक दिन कहने लगा कि राजन क्या तुम आज फ्री हो तो मैंने उससे कहा हां निखिल मैं आज फ्री हूं निखिल मुझे कहने लगा कि क्या तुम मेरे साथ आज मेरी मौसी के लड़के की शादी में चल सकते हो। मैंने उसे कहा लेकिन वहां आकर मैं क्या करूंगा मुझे तो कोई जानता भी नहीं है निखिल मुझे कहने लगा कि तुम चलो तो सही मैं तुम्हारे साथ हूं। निखिल कहने लगा आज पापा ऑफिस के काम से पटना गए हुए हैं और मम्मी की तबीयत काफी दिनों से ठीक नहीं है इसलिए मुझे ही शादी में जाना पड़ रहा है यदि तुम मेरे साथ चलोगे तो मुझे भी अच्छा लगेगा और मुझे भी किसी की कंपनी मिल जाएगी। मैंने निखिल से कहा चलो ठीक है मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूं हम दोनों जाने की तैयारी में थे मैंने निखिल से कहा मैं तुम्हारे घर पर आ जाता हूं निखिल कहने लगा ठीक है तुम मेरे घर पर ही आ जाओ। मैं निखिल के घर पर चला गया और जब मैं निखिल के घर पर गया तो निखिल मुझे कहने लगा कि चलो यार अब देर हो जाएगी। मैंने उसे कहा तुम अभी तक तैयार ही नहीं हुए निखिल मुझे कहने लगा बस थोड़ी देर में तैयार हो जाता हूं मुझे तुम 10 मिनट का समय दो।

    10 मिनट बाद निखिल तैयार हो चुका था और हम लोग वहां से बैंक्विट हॉल में पहुंचे तो वहां पर बारात पहले से ही पहुंच चुकी थी हम लोगों को पहुंचने में थोड़ा देरी हो गई थी। निखिल की मौसी हमे मिली और वह निखिल से कई प्रकार के सवाल पूछने लगी निखिल की मौसी कहने लगी मम्मी क्यों नहीं आई। निखिल ने कहा कि मम्मी की तबीयत का तो आपको पता ही है कि उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती और पापा भी ऑफिस के जरूरी काम से पटना गए हुए हैं। निखिल की मौसी कहने लगी कि चलो कोई बात नहीं बेटा तुम आए तो मुझे इस बात की खुशी है। हम दोनों साथ में ही थे और निखिल ने मुझे अपने रिश्तेदारों से मिलवाया निखिल ने मुझे कहा कि तुम यहीं बैठ जाओ। मैंने निखिल से कहा लेकिन तुम कहां जा रहे हो तो निखिल कहने लगा कि मैं बस अभी आया, मैं वहीं चेयर पर बैठा हुआ था तभी मेरे सामने एक लड़की आकर बैठी। जब वह बैठी तो मैं उसकी तरफ भी देख रहा था वह ना जाने क्या मुंह के अंदर बोल रही थी कुछ पता ही नहीं चल रहा था वह थोड़ा गुस्से में थी मैं उसकी तरफ देख रहा था तो उसने मुझे कहा तुम ऐसे मेरी तरफ क्या देख रहे हो। मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी तरफ तो नहीं देख रहा लेकिन वह अभी भी गुस्से में नजर आ रही थी मैंने उसके गुस्से को शांत करवाते हुए कहा तुम्हारा क्या नाम है तो वह कहने लगी मेरा नाम मीनाक्षी है। मैंने मीनाक्षी से कहा देखो मीनाक्षी तुम्हारा मूड मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है मीनाक्षी ने मुझे कहा हां मेरा मूड कुछ ठीक नहीं है। मैंने उसे कहा लेकिन तुम ऐसे गुस्से में क्यों हो मीनाक्षी कहने लगी कि मेरी बहन के साथ मेरा झगड़ा हो गया और वह मुझसे अच्छे से बात भी नहीं करती है हमेशा मम्मी पापा का प्यार उसे ही मिला। मैंने मीनाक्षी को कहा देखो मीनाक्षी तुम्हें दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है उसे मुझसे बात करना अच्छा लगा और तभी निखिल भी आ गया। निखिल को मैंने मीनाक्षी से मिलवाया तो मीनाक्षी हम दोनों के साथ बात करने लगी और उसे हमारे साथ बात करना अच्छा लगा।

    मीनाक्षी ने शायद हम दोनों से ही दोस्ती कर ली थी और मैंने मीनाक्षी का नंबर भी ले लिया था मेरे पास अब मीनाक्षी का नंबर आ चुका था और उसके बाद मेरी और मीनाक्षी की बातें फोन पर अक्सर होने लगी। मीनाक्षी जब भी दुखी होती तो वह मुझे ही फोन किया करती मुझे भी अच्छा लगता था क्योंकि मेरे जीवन में भी अकेलापन था मैं सिर्फ निखिल के साथ ही अपनी बातों को साझा किया करता था लेकिन अब मेरे जीवन में मीनाक्षी आ चुकी थी और मीनाक्षी के आने से मैं अपनी बातें मीनाक्षी से किया करता था। हम दोनों एक दूसरे से मिलते भी थे हम लोगों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी लेकिन यह दोस्ती अब शायद कोई और ही रूप लेने लगी थी। मैंने मीनाक्षी से कहा मुझे लगता है कि हम दोनों अब एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं तो मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि राजन तुम सही कह रहे हो मुझे भी लगता है कि तुम मेरे लिए सही हो तुम मेरा ध्यान भी रखते हो और मुझे बहुत अच्छा भी लगता है। मैंने जब मीनाक्षी से यह बात कही की जबसे मैंने तुम्हें देखा है तब से ही मैंने तुमसे प्यार कर लिया था। मीनाक्षी कहने लगी पहले तो मुझे लगा था कि शायद हम लोगों के बीच कभी दोस्ती भी नहीं हो पाएगी लेकिन हम दोनों का रिश्ता इतना आगे बढ़ चुका है की मैंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी।

    मीनाक्षी की उम्मीदों से परे मैंने हम दोनों के रिश्ते को और भी आगे बढ़ा दिया हम दोनों अब एक दूसरे से मिलकर खुश होते थे यह बात निखिल को भी पता चल चुकी थी। निखिल ने मुझे कहा तुम तो बड़े शातिर निकले तुमने मीनाक्षी को अपने दिल की बात कह दी और मुझे इस बारे में बताया भी नहीं। मैंने निखिल से कहा यार दोस्त तुम्हें क्या बताऊं बस मीनाक्षी को मैंने अपने दिल की बात कह दी क्योंकि वह मुझे अच्छी लगी और मुझे उसकी हर एक बातें अच्छी लगती हैं। निखिल मुझे कहने लगा तुमने अच्छा किया जो मीनाक्षी को अपने दिल की बात कह दी क्योंकि मुझे भी लगता था कि वह तुम्हें पसंद करती है और उसके दिल में तुम्हारे लिए प्यार है। जब मैंने निखिल को इस बारे में बताया कि मीनाक्षी की बहन के साथ उसके बिल्कुल भी अच्छे रिलेशन नहीं है तो निखिल मुझे कहने लगा कि ऐसा कई बार होता है लेकिन सब कुछ ठीक होने लगेगा। निखिल और मैं अब भी पहले की तरह ही एक दूसरे के अच्छे दोस्त हैं और मेरे जीवन में मीनाक्षी के आने से अब काफी बदलाव भी आने लगा है मीनाक्षी भी अब जॉब करने लगी थी। मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि मैं पहले तो चाहती नहीं थी कि मैं नौकरी करूं लेकिन जब से मैंने नौकरी शुरू की है तब से मैं खुश हूं। मीनाक्षी और मेरे जीवन में सब कुछ अच्छे से चल रहा था। हम दोनों के जीवन में बहुत ही खुशियां थी मीनाक्षी को जब मैंने अपने घर पर बुलाया तो वह बहुत खुश थी और मीनाक्षी के होठों को मैंने किस भी कर लिया था। उसके बाद यह सिलसिला कई बार चलता रहा लेकिन हम दोनों के बीच में सेक्स संबंध बनने जा रहे थे मीनाक्षी के कपड़ों को खोल कर मैंने उसके नंगे बदन को अपनी बाहों में लिया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी।

    मैंने जब उसके पैरों को खोलते हुए उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आने लगा वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। काफी देर तक मैं उसकी चूत को चाटता रहा उसके बाद उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा तो वह मुझे कहने लगी मैं अब रह नहीं पाऊंगी। वह शायद नही रह पा रही थी इसलिए मैंने मीनाक्षी की चूत पर अपने लंड को लगाया। वह मुझे कहने लगी तुम अपने लंड को मेरी योनि के अंदर घुसा दो। मैंने मीनाक्षी की चूत में लंड को घुसा दिया था और जैसे मीनाक्षी की चूत में मेरा लंड घुसा तो उसकी चूत से खून बाहर की तरफ को निकालने लगा उसकी चूत मुझे टाइट होने का आभास हो रहा था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। वह भी बहुत ज्यादा खुश नजर आ रही थी मैं उसे लगातार तीव्र गति से धक्के मारता जा रहा था। जब मैंने मीनाक्षी की चूतडो को पकड़कर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह मुझसे कहने लगी कि मैं अपनी चूतडो को तुम्हारी तरफ धक्का मार रही हूं। वह मुझसे अपनी चूतडो को टकराने लगी थी और मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था मुझे उसे चोदने में मजा आ रहा था।

    उसकी चूत का टाइटपन मुझे साफ महसूस हो रहा था और काफी देर तक मैं उसकी चूत के मजे लेता रहा लेकिन जब मेरे लंड से खून निकलने लगा तो मैंने मीनाक्षी से कहा मुझसे बिल्कुल रहा नहीं जाएगा। मीनाक्षी कहने लगी मेरी भी हालत खराब हो चुकी है लेकिन उसके बावजूद भी हम दोनों एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाते रहे और मेरी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा है। मैंने मीनाक्षी से कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने माल को गिराना चाहता हूं और मैंने मीनाक्षी की चूत के अंदर अपने माल को प्रवेश करवा दिया। जब मीनाक्षी के अंदर मेरा माल गिरा तो वह मुझे कहने लगी आज तो तुमने मेरी हालत ही खराब कर दी है। मैंने उसे कहा मैं भी कुछ ठीक नहीं हूं लेकिन तुम्हारे साथ आज मुझे बहुत मजा आया। मुझे मीनाक्षी कहने लगी मैं तुम्हारा हमेशा इंतजार करती रहूंगी ऐसे ही तुम मुझे चोदते रहना। मैंने मीनाक्षी से कहा हां मैं तुम्हें ऐसे ही चोदता रहूंगा। हम दोनों के बीच उसके बाद भी कई बार शारीरिक संबंध बने और हम दोनों को एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाने में बहुत अच्छा लगता है। हम दोनों एक दूसरे की जरूरतों को ऐसे ही पूरा करते हैं।


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